झारखंड बजट पर वित्त मंत्री सख्त, 60 दिन में टेंडर पूरा नहीं हुआ तो बढ़ेगी मुश्किल

झारखंड बजट पर वित्त मंत्री सख्त, 60 दिन में टेंडर पूरा नहीं हुआ तो बढ़ेगी मुश्किल

रांची। झारखंड में वित्तीय वर्ष 2026-27 के योजना बजट के खर्च की धीमी रफ्तार को लेकर राज्य सरकार की चिंता बढ़ गई है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए विकास आयुक्त को पत्र लिखा है। पत्र में निर्माण कार्यों से जुड़े विभागों में टेंडर प्रक्रिया में हो रही देरी को प्रमुख समस्या बताया गया है। मंत्री के अनुसार, टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने में छह महीने से लेकर डेढ़ साल तक का समय लग रहा है। इससे विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ रहा है और बजट की राशि समय पर खर्च नहीं हो पा रही है।

टेंडर प्रक्रिया 60 दिनों में पूरी करने का निर्देश

वित्त मंत्री ने संबंधित निर्माण विभागों को टेंडर प्रक्रिया में तेजी लाने और इसे अधिकतम 60 दिनों के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया है। उनका मानना है कि टेंडर में अनावश्यक देरी के कारण कई योजनाएं समय पर शुरू नहीं हो पाती हैं। इसका असर न केवल विकास कार्यों की गति पर पड़ता है, बल्कि वित्तीय वर्ष के दौरान आवंटित बजट के उपयोग पर भी दिखाई देता है।

मंत्री ने कम खर्च करने वाले विभागों की समीक्षा करने की भी बात कही है। इसके लिए संबंधित विभागों के सचिवों के साथ विशेष बैठक आयोजित कर योजनाओं की प्रगति और खर्च की स्थिति का आकलन करने का निर्देश दिया गया है। सरकार की कोशिश है कि लंबित प्रक्रियाओं को जल्द पूरा कर विकास कार्यों को गति दी जाए।

योजना बजट का 29.38 प्रतिशत ही खर्च

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के पुनरीक्षित योजना बजट के लिए कुल 1,06,200.94 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इनमें से 22 अक्टूबर 2026 तक 31,196.72 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए थे। इस तरह कुल बजट का लगभग 29.38 प्रतिशत ही उपयोग किया जा सका है।

वित्तीय वर्ष के छह महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी खर्च का स्तर अपेक्षाकृत कम रहने से सरकार के सामने शेष अवधि में योजनाओं को पूरा करने की चुनौती खड़ी हो गई है। बजट की राशि का उपयोग नहीं होने से विकास कार्यों की समयसीमा प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है।

दिसंबर तक 75 हजार करोड़ खर्च करने का लक्ष्य

वित्त मंत्री ने वित्तीय वर्ष के शेष महीनों में बजट खर्च की गति बढ़ाने पर जोर दिया है। दिसंबर 2026 तक 75,000 करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए 22 अक्टूबर तक खर्च हुई राशि के अतिरिक्त लगभग 43,803 करोड़ रुपये और खर्च करने होंगे।

इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए विभागों को प्रतिदिन औसतन करीब 626 करोड़ रुपये खर्च करने की जरूरत होगी। हालांकि, यह गणना लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आवश्यक औसत खर्च पर आधारित है। इसे हासिल करने के लिए लंबित टेंडरों का निपटारा, योजनाओं की नियमित समीक्षा और आवंटित राशि का समयबद्ध उपयोग जरूरी होगा।

ट्रांसपोर्ट नगर और सड़क परियोजनाओं पर असर

बजट खर्च की धीमी रफ्तार और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी का असर राजधानी रांची की कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर भी पड़ने की बात सामने आई है। नगर विकास विभाग के अंतर्गत रांची में प्रस्तावित ट्रांसपोर्ट नगर फेज-2 का निर्माण जुडको (JUDCO) के माध्यम से किया जाना है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, परियोजना से जुड़ी प्रशासनिक और कागजी प्रक्रियाएं पूरी होने के बावजूद निर्माण कार्य में अपेक्षित तेजी नहीं आई है।

इसके अलावा, जुडको के माध्यम से संचालित रांची की महत्वपूर्ण जलापूर्ति योजनाओं की प्रगति भी प्रभावित बताई गई है। वहीं, पथ निर्माण विभाग के तहत राजधानी में करीब 1,401 करोड़ रुपये की लागत वाली 10 प्रमुख सड़क परियोजनाओं पर काम होना है। इन योजनाओं की प्रगति को लेकर भी प्रशासनिक और वित्तीय स्तर पर तेजी लाने की जरूरत जताई गई है।

विभागों के सामने समय पर काम पूरा करने की चुनौती

राज्य सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक ओर बजट की राशि का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है, वहीं दूसरी ओर विकास योजनाओं को तय समयसीमा के भीतर धरातल पर उतारना भी जरूरी है। टेंडर प्रक्रिया को 60 दिनों में पूरा करने का निर्देश इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।

आने वाले महीनों में विभागीय समीक्षा, लंबित टेंडरों के निपटारे और परियोजनाओं की प्रगति पर निगरानी से यह स्पष्ट होगा कि सरकार बजट खर्च के लक्ष्य के कितने करीब पहुंच पाती है।

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