शराब नीति पर बाबूलाल मरांडी का हमला, हेमंत सोरेन से पूछे कई सवाल

शराब नीति पर बाबूलाल मरांडी का हमला, हेमंत सोरेन से पूछे कई सवाल

रांची: झारखंड की शराब नीति को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया है। उन्होंने शराब नीति में कथित अनियमितताओं और ACB जांच में सामने आए आरोपों का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

बाबूलाल मरांडी ने अपने पोस्ट में अनवर ढेबर, तत्कालीन उत्पाद विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार चौबे और अरुणपति त्रिपाठी का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि जांच में शराब नीति में बदलाव और JSBCL के सलाहकार की नियुक्ति से जुड़े कथित लेन-देन की बातें सामने आई हैं।

गौरतलब है कि झारखंड हाईकोर्ट में अरुणपति त्रिपाठी से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान ACB की ओर से ₹5 करोड़ की कथित रिश्वत के आरोप और जांच के दौरान दर्ज गवाहों के बयानों का उल्लेख किया गया था।

₹50 करोड़ और ₹5 करोड़ के आरोपों का जिक्र

बाबूलाल मरांडी ने अपने बयान में आरोप लगाया कि शराब नीति में संशोधन कराने के लिए ₹50 करोड़ की कथित रिश्वत दिए जाने की बात जांच में सामने आई है। इसके अलावा अरुणपति त्रिपाठी को JSBCL का सलाहकार बनाए जाने से जुड़े ₹5 करोड़ के कथित भुगतान का भी उन्होंने उल्लेख किया।

हाल में सामने आई ACB जांच संबंधी रिपोर्ट में भी उत्पाद नीति में बदलाव और सलाहकार नियुक्ति से जुड़े कुल ₹55 करोड़ के कथित लेन-देन का उल्लेख किया गया है। ACB के अनुसार, जांच में कई लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं और अरुणपति त्रिपाठी की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं।

हालांकि, इन रकम और लेन-देन से जुड़े आरोप जांच का हिस्सा हैं। इन्हें अदालत द्वारा अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य के तौर पर पेश नहीं किया जा सकता। अरुणपति त्रिपाठी ने भी अदालत में ₹5 करोड़ की रिश्वत देने के आरोप से इनकार किया है।

छत्तीसगढ़ मॉडल पर भी उठाए सवाल

बाबूलाल मरांडी ने झारखंड में छत्तीसगढ़ मॉडल पर आधारित शराब नीति लागू किए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों की एक टीम को छत्तीसगढ़ मॉडल का अध्ययन करने रायपुर भेजा गया था और कम समय में रिपोर्ट तैयार कर उसकी सिफारिश कर दी गई।

उन्होंने सवाल किया कि शराब नीति में इतने बड़े बदलाव और उससे जुड़े फैसलों की प्रक्रिया में मुख्यमंत्री कार्यालय की भूमिका और जानकारी क्या थी।

ACB की जांच से जुड़े दस्तावेजों में भी यह उल्लेख है कि वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ मॉडल से जुड़ी व्यवस्था को झारखंड में लागू किया गया था। जांच में अरुणपति त्रिपाठी की JSBCL में सलाहकार के तौर पर नियुक्ति का भी उल्लेख है।

हेमंत सोरेन से बाबूलाल ने मांगा जवाब

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को संबोधित करते हुए सवाल उठाया कि यदि शराब नीति में बदलाव, सलाहकार की नियुक्ति और कथित बड़े वित्तीय लेन-देन हुए, तो सरकार के शीर्ष स्तर पर इसकी जानकारी कितनी थी।

उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी दावा किया कि उन्होंने शराब नीति में कथित गड़बड़ी को लेकर पहले ही सरकार को सचेत किया था। उनके मुताबिक, बाद की जांच में सामने आए तथ्यों ने उनके पुराने सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है।

हालांकि, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ओर से इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी गई है, यह अलग विषय है। राजनीतिक आरोपों और जांच एजेंसियों की ओर से सामने रखे गए तथ्यों को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है।

शराब घोटाला मामले में जांच जारी

झारखंड शराब मामले में ACB की जांच पहले से चल रही है। अप्रैल 2026 में झारखंड हाईकोर्ट के एक आदेश में ACB की ओर से पेश किए गए कई गवाहों के बयानों और कथित ₹5 करोड़ के भुगतान से जुड़े आरोपों का विस्तृत उल्लेख किया गया था। अदालत ने आदेश में जांच के दौरान सामने आए आपत्तिजनक सामग्री का भी जिक्र किया।

इस मामले में शराब नीति, प्लेसमेंट एजेंसियों, सलाहकार की नियुक्ति और कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़े अलग-अलग पहलुओं की जांच हो रही है। ऐसे में बाबूलाल मरांडी के ताजा बयान ने झारखंड की शराब नीति को लेकर राजनीतिक बहस को फिर तेज कर दिया है।

आने वाले समय में जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई और अदालतों में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों के संबंध में जांच का निष्कर्ष क्या निकलता है।

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