झारखंड के सरकारी स्कूलों की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त, JEPC से मांगा पूरा ब्योरा

झारखंड के सरकारी स्कूलों की बदहाली पर हाईकोर्ट सख्त, JEPC से मांगा पूरा ब्योरा

रांची: झारखंड में सरकारी विद्यालयों की जर्जर स्थिति, शिक्षकों की कमी और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामले पर झारखंड हाईकोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और उनके शिक्षा के अधिकार से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जा सकता।

अदालत ने अधिकारियों को किसी अप्रिय घटना का इंतजार करने के बजाय जर्जर और संवेदनशील विद्यालय भवनों का तत्काल भौतिक निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट ने स्कूलों की मौजूदा स्थिति का आकलन कर आवश्यक मरम्मत और अन्य सुधारात्मक कदम उठाने को कहा है।

सरकार और JEPC से मांगा विस्तृत ब्योरा

खंडपीठ ने राज्य सरकार और झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) को स्कूलों की वर्तमान स्थिति से जुड़ी विस्तृत जानकारी शपथपत्र के माध्यम से पेश करने का निर्देश दिया है। इसमें जर्जर भवनों की स्थिति, जरूरी मरम्मत कार्य और शिक्षकों के रिक्त पदों का ब्योरा शामिल है।

अदालत यह भी देखेगी कि राज्य के किन सरकारी विद्यालयों में भवनों की स्थिति गंभीर है और किन स्कूलों में शिक्षकों की कमी अधिक है। इसके आधार पर संबंधित विभागों को जमीनी स्थिति की जानकारी अदालत के समक्ष रखने होगी।

कई स्कूलों में एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई

सुनवाई के दौरान सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी सामने आया। अदालत के समक्ष यह स्थिति बताई गई कि कई विद्यालयों में सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे पढ़ाई संचालित हो रही है। इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई और स्कूलों के संचालन पर असर पड़ने की चिंता जताई गई।

दूसरी ओर, कई सरकारी स्कूलों के भवन भी जर्जर बताए गए हैं। ऐसे विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हाईकोर्ट ने इसी स्थिति को देखते हुए अधिकारियों को पहले से कार्रवाई करने और जरूरी कमियों को दूर करने का निर्देश दिया है।

5 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

यह मामला सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर हाईकोर्ट द्वारा लिए गए स्वत: संज्ञान से जुड़ा है। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से जमीनी स्थिति की जानकारी और आवश्यक कार्रवाई का ब्योरा मांगा है।

मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है। अब सरकार और JEPC की ओर से दाखिल की जाने वाली रिपोर्ट पर अदालत की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

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