रांची विधानसभा घेराव मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 100 नामजद और 500 अज्ञात पर प्राथमिकी
- By rakesh --
- 11 Aug 2026 --
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रांची: विधानसभा घेराव के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच हुई झड़प के मामले में रांची पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, मामले में करीब 100 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि 500 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।
प्राथमिकी में प्रदर्शनकारियों पर सरकारी काम में बाधा डालने, पुलिसकर्मियों के साथ नोकझोंक, धक्का-मुक्की, बदसलूकी और मारपीट के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने पुलिसकर्मियों पर पत्थर भी फेंके, जिससे कई जवानों के घायल होने की बात कही गई है।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़प का आरोप
पुलिस के मुताबिक विधानसभा घेराव के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई की और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई।
मामले की जांच के दौरान पुलिस घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और उपलब्ध जानकारी के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है। आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
लालपुर थाने में भी दर्ज हुआ अलग मामला
इसी घटनाक्रम से जुड़े एक अन्य मामले में लालपुर थाना में भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह मामला आठ अगस्त को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) झारखंड की ओर से निकाले गए मार्च से संबंधित है।
प्राथमिकी के लिए आवेदन डॉ. तनवीर अख्तर की ओर से दिया गया है। वह पिस्का मोड़ स्थित प्रभारी वरीय पशु चिकित्सा एवं पशुपालन पदाधिकारी हैं।
आवेदन के अनुसार, आठ अगस्त को सदर अनुमंडल कार्यालय के आदेश पर डॉ. अख्तर की प्रतिनियुक्ति मोरहाबादी मैदान में मजिस्ट्रेट के रूप में की गई थी। वह पुलिस अधिकारियों और जवानों के साथ मार्च के दौरान मौजूद थे।
बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़ने का आरोप
पुलिस के अनुसार, मार्च को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के रांची गेट के पास रोकने का प्रयास किया गया था। इसी दौरान तेज बारिश शुरू होने के बाद कुछ प्रदर्शनकारी इधर-उधर जाने लगे।
आरोप है कि इसी दौरान कुछ लोगों ने बांस-बल्लियों से बनाई गई बैरिकेडिंग को तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की। इसके बाद मार्च को सिद्धू-कान्हू मोड़ के पास रोका गया।
सरकारी वाहन रोकने का भी आरोप
पुलिस के मुताबिक कुछ लोगों को सरकारी वाहन में बैठाकर ले जाने की प्रक्रिया के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी वाहन के रास्ते में आ गए। आरोप है कि कुछ लोग वाहन पर चढ़ गए और पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया।
करीब आधे घंटे बाद प्रदर्शनकारी नारेबाजी करते हुए वहां से चले गए। पुलिस ने पूरे घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू कर दी है।
भाजपा नेताओं की हिरासत, प्राथमिकी पर स्थिति साफ नहीं
सोमवार को मुख्यमंत्री आवास घेराव के दौरान भाजपा के करीब 102 नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई थी। बाद में सभी को पीआर बांड पर छोड़े जाने की बात पुलिस की ओर से कही गई।
पुलिस के अनुसार, भाजपा नेताओं के खिलाफ फिलहाल प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, पुलिस का कहना है कि विधानसभा घेराव और संबंधित प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं में जिन लोगों की भूमिका सामने आएगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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