Jharkhand Politics: MMDR संशोधन पर गरमाई सियासत, अन्नपूर्णा देवी ने विपक्ष पर लगाए ये आरोप

Jharkhand Politics: MMDR संशोधन पर गरमाई सियासत, अन्नपूर्णा देवी ने विपक्ष पर लगाए ये आरोप

रांची: MMDR संशोधन अधिनियम-2026 को लेकर झारखंड की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस, झामुमो और दूसरे विपक्षी दल इस कानून का विरोध कर रहे हैं, तो भाजपा की ओर से इसे लेकर लगातार जवाब दिया जा रहा है। इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने शनिवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में कानून के प्रावधानों और इसके संभावित प्रभावों को लेकर पार्टी का पक्ष रखा।

उन्होंने विपक्षी दलों के विरोध को जनता को भ्रमित करने वाला बताया और कहा कि झारखंड जैसे खनिज संपदा वाले राज्य में कानून में बदलाव से निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। उनके मुताबिक इससे राज्य के युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलने की संभावनाएं बढ़ेंगी और पलायन पर भी असर पड़ सकता है।

केंद्र सरकार के आधिकारिक विवरण के अनुसार, MMDR संशोधन अधिनियम-2026 का उद्देश्य खनन क्षेत्र की कर व्यवस्था में अधिक स्थिरता, एकरूपता और पूर्वानुमेयता लाना है। सरकार का कहना है कि राज्यों को मिलने वाले खनन राजस्व के बड़े हिस्से पर इस बदलाव का असर नहीं पड़ेगा।

अन्नपूर्णा देवी ने टैक्स व्यवस्था को लेकर रखी अपनी बात

अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि संशोधन का एक प्रमुख उद्देश्य खनन क्षेत्र में टैक्स व्यवस्था को अधिक सुसंगत और पारदर्शी बनाना है। उनके अनुसार, नीलामी के बाद अलग-अलग प्रकार के टैक्स और सेस लगाए जाने से कारोबारियों के सामने परेशानी आती थी।

केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि नए प्रावधानों से ऐसी स्थिति में बदलाव आएगा और खनन कारोबार में काम करने वाले लोगों के लिए नियम अधिक स्पष्ट होंगे।

केंद्र सरकार भी संशोधन को खनन क्षेत्र में अलग-अलग तरह के शुल्क और लेवी से पैदा होने वाली अनिश्चितता को कम करने के प्रयास के रूप में बता रही है। सरकार के अनुसार, नई व्यवस्था के तहत राज्यों द्वारा खनिज अधिकारों या खनिज वाली जमीन पर नई लेवी लगाने को केंद्र द्वारा निर्धारित शर्तों के अधीन किया गया है।

झारखंड सरकार पर लगाए कई आरोप

केंद्रीय मंत्री ने झारखंड सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार समय पर खनिजों की नीलामी नहीं कराती और इसी वजह से MMDR संशोधन का विरोध कर रही है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार अवैध खनन और कोयला चोरी को बढ़ावा देने वाली व्यवस्था के खिलाफ प्रभावी तरीके से काम नहीं कर रही है। हालांकि, ये केंद्रीय मंत्री द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर राज्य सरकार या संबंधित दलों का पक्ष इस बयान में शामिल नहीं है।

अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के लक्ष्य के तहत खनन क्षेत्र में भी एकरूपता और व्यवस्थित व्यवस्था लाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसी दिशा में MMDR कानून में संशोधन किया गया है।

निवेश और उद्योग को लेकर क्या है दावा?

केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, कानून में बदलाव के बाद खनन क्षेत्र में काम करने वाले छोटे, मंझले और बड़े उद्योगों के लिए कारोबार करना आसान होगा। उन्होंने कहा कि नियमों में स्पष्टता आने से उद्योगपतियों के सामने कानूनी और प्रशासनिक अनिश्चितता कम हो सकती है।

उन्होंने दावा किया कि इससे झारखंड में नए निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी और रोजगार के अवसर भी बनेंगे।

केंद्र सरकार की ओर से भी संशोधन को निवेश और खनन क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता से जोड़कर बताया गया है। सरकार का कहना है कि स्थिर और अनुमानित वित्तीय व्यवस्था निवेश को प्रोत्साहित कर सकती है।

विपक्ष के विरोध के बीच जारी है राजनीतिक बहस

MMDR संशोधन को लेकर झारखंड में भाजपा और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक मतभेद सामने आ रहे हैं। विपक्षी दल कानून के प्रावधानों को लेकर अपनी आपत्तियां जता रहे हैं, जबकि भाजपा इसे खनन क्षेत्र में व्यवस्था सुधारने और निवेश बढ़ाने की दिशा में उठाया गया कदम बता रही है।

अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि यह कानून केवल झारखंड तक सीमित नहीं है और उन्होंने दूसरे राज्यों में भी इसके लागू होने का जिक्र किया। वहीं, केंद्र सरकार के आधिकारिक दस्तावेज में भी संशोधन को प्रमुख खनिज क्षेत्र में स्थिरता और एक समान वित्तीय ढांचे से जोड़कर पेश किया गया है।

फिलहाल MMDR संशोधन कानून को लेकर झारखंड में राजनीतिक बहस जारी है। एक ओर केंद्र सरकार और भाजपा इसके जरिए खनन क्षेत्र में स्थिरता, निवेश और रोजगार बढ़ने की बात कह रही है, वहीं विरोधी दल इसके प्रावधानों को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज करा रहे हैं।

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