सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले झारखंड DGP नियुक्ति पर सवाल, सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हुआ अहम नोट
- By rakesh --
- 05 Sep 2026 --
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नई दिल्ली। झारखंड में पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक अहम नोट दाखिल किया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता और एमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन ने अदालत में दाखिल अपने नोट में तादाशा मिश्रा की नियुक्ति पर आपत्ति जताई है। नोट में नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के अनुरूप नहीं होने का दावा किया गया है।
मामला झारखंड सरकार के 30 दिसंबर 2025 के उस फैसले से जुड़ा है, जिसके तहत तादाशा मिश्रा को राज्य का DGP नियुक्त किया गया था। नोट के अनुसार, उनकी नियुक्ति सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले की गई थी।
नियुक्ति को लेकर क्या है आपत्ति
एमिकस क्यूरी राजू रामचंद्रन ने अपने नोट में कहा है कि तादाशा मिश्रा को 30 दिसंबर 2025 को झारखंड का DGP नियुक्त किया गया, जबकि वह अगले ही दिन सेवानिवृत्त होने वाली थीं।
नोट में सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों का हवाला दिया गया है, जिनके अनुसार DGP पद के लिए चुने जाने वाले अधिकारी के पास कम से कम छह महीने की सेवा शेष होनी चाहिए। तादाशा मिश्रा 1994 बैच की IPS अधिकारी और झारखंड कैडर की अधिकारी हैं।
DGP नियुक्ति नियमों की हुई जांच
एमिकस क्यूरी ने “Selection and Appointment of DGP, Jharkhand Rules, 2025” की भी जांच की है। यह मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष चल रही सुनवाई से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट की यह पीठ विभिन्न राज्यों में DGP नियुक्ति की प्रक्रिया और इस दौरान अदालत के पूर्व निर्देशों के कथित उल्लंघन से जुड़े मामलों पर सुनवाई कर रही है।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की ओर से भी इस मामले में याचिका दायर की गई है। याचिका में राज्य सरकार के संशोधित नियमों को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों के अनुरूप नहीं होने की घोषणा करने की मांग की गई है।
अगस्त में सुप्रीम कोर्ट ने एमिकस क्यूरी से मामले में अपना नोट दाखिल करने को कहा था। बाबूलाल मरांडी की ओर से अधिवक्ता अभिषेक राय और ज्ञानंत सिंह पेश हुए।
प्रकाश सिंह फैसले का दिया गया हवाला
राजू रामचंद्रन ने अपने नोट में तादाशा मिश्रा की नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह-I, II और III फैसलों एवं आदेशों में निर्धारित सिद्धांतों के संदर्भ में देखा है।
नोट में कहा गया है कि मौजूदा DGP की सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले की गई नियुक्ति इन फैसलों में तय सिद्धांतों का उल्लंघन है। हालांकि, नोट में यह भी कहा गया है कि झारखंड के विवादित नियमों के कई प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक प्रकाश सिंह फैसलों की भावना के अनुरूप हैं।
एमिकस क्यूरी ने कुछ प्रावधानों में अधिक स्पष्टता और सुरक्षा उपायों की जरूरत भी बताई है, ताकि DGP नियुक्ति की प्रक्रिया में मनमानी और राजनीतिक हस्तक्षेप की संभावना को रोका जा सके।
प्रकाश सिंह मामले में DGP चयन को लेकर क्या निर्देश है
प्रकाश सिंह मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने DGP की नियुक्ति को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए थे। इनमें कहा गया है कि DGP पद के लिए ऐसे अधिकारियों पर विचार किया जाए, जिनके पास कम से कम छह महीने की सेवा शेष हो।
वर्ष 2006 के प्रकाश सिंह फैसले में राज्य के DGP का चयन UPSC द्वारा एम्पेनल किए गए वरिष्ठ अधिकारियों में से करने की व्यवस्था बताई गई थी। एम्पेनमेंट में सेवा अवधि, बहुत अच्छा रिकॉर्ड और पुलिस बल का नेतृत्व करने के लिए आवश्यक अनुभव जैसे मानकों को ध्यान में रखा जाता है।
झारखंड में DGP नियुक्ति से जुड़ा मौजूदा विवाद इन्हीं दिशा-निर्देशों और राज्य के संशोधित नियुक्ति नियमों के बीच सामंजस्य से जुड़ा हुआ है। मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आगे की सुनवाई के दौरान स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
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