नामकुम जमीन मामले में तत्कालीन CO श्वेता वर्मा समेत 3 अधिकारियों पर FIR

Ranchi News: नामकुम जमीन मामले में तत्कालीन CO श्वेता वर्मा समेत तीन अधिकारियों पर FIR

रांची: नामकुम अंचल में जमीन की खरीद-बिक्री और राजस्व दस्तावेजों के गायब होने के मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने प्राथमिकी दर्ज की है। झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में दर्ज इस प्राथमिकी में नामकुम अंचल की तत्कालीन अंचल अधिकारी (CO) श्वेता वर्मा समेत तीन अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है।

FIR में तत्कालीन CO श्वेता वर्मा के अलावा तत्कालीन सर्किल इंस्पेक्टर (CI) मनोज कुमार और दीपक कुमार का नाम शामिल है।

हाईकोर्ट में ACB ने दी FIR की जानकारी

ACB की ओर से इस कार्रवाई की जानकारी हाईकोर्ट को शपथ पत्र के माध्यम से दी गई। मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत में हुई।

ACB का पक्ष सुनने के बाद अदालत ने संबंधित अवमानना याचिका को ड्रॉप कर दिया। ACB की ओर से सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल सुमित गाड़ोदिया ने पक्ष रखा। वहीं, प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता जेजे सांगा ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।

कोर्ट ने पहले दिया था FIR दर्ज करने का निर्देश

इस मामले की पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने नामकुम अंचल की जमीन की खरीद-बिक्री और राजस्व दस्तावेजों के गायब होने के मामले में ACB को FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था।

अदालत ने मामले में नामकुम अंचल के दोषी अधिकारियों के संबंध में सीलबंद रिपोर्ट भी मांगी थी। इसके बाद ACB ने प्राथमिकी दर्ज कर अदालत को इसकी जानकारी दी।

म्यूटेशन और मूल दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराने का मामला

पूरा मामला जमीन के दाखिल-खारिज यानी म्यूटेशन में कथित गड़बड़ी और मूल राजस्व अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जाने से जुड़ा है। प्रार्थी थॉमस साइमन ने इस संबंध में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि नामकुम अंचल कार्यालय में एक म्यूटेशन प्रकरण में गंभीर अनियमितता की गई। साथ ही जांच के लिए मांगे जाने के बावजूद मूल राजस्व रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराए जा रहे थे।

विवादित जमीन नामकुम अंचल के डुंडु क्षेत्र में स्थित बताई गई है।

प्रमाणित प्रति देने में भी टालमटोल का आरोप

पूर्व की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह मामला भी आया था कि अंचल कार्यालय दूसरे पक्षकार के पक्ष में किए गए म्यूटेशन की प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने में लगातार टालमटोल कर रहा था।

प्रार्थी के पक्ष में हाईकोर्ट की ओर से पहले स्पष्ट आदेश दिए जाने के बावजूद अंचल अधिकारियों द्वारा उसका अनुपालन नहीं किए जाने की बात भी सामने आई थी।

अदालत ने प्रथम दृष्टया सरकारी रिकॉर्ड में हुई कथित अनियमितता को गंभीर माना था। इसके बाद पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी ACB को सौंपी गई। अब ACB की ओर से प्राथमिकी दर्ज किए जाने की जानकारी अदालत को दी गई है।

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