Ranchi News: नियुक्ति अनियमितता की जांच के दायरे में 17 परीक्षाएं, JPSC-6 भी शामिल
- By rakesh --
- 28 Aug 2026 --
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रांची: झारखंड में नियुक्तियों में कथित अनियमितता की जांच का दायरा बढ़ाया गया है। राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2014 से हुई नियुक्तियों में अनियमितता की आशंका को देखते हुए 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में शामिल किया गया है। इनमें झारखंड लोक सेवा आयोग की छठी सिविल सेवा परीक्षा यानी JPSC-6 भी शामिल है।
यह कार्रवाई नियुक्ति प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका को लेकर की जा रही जांच के क्रम में हुई है। सरकार ने मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद वर्ष 2014 से हुई नियुक्तियों को भी जांच के दायरे में शामिल करने का निर्णय लिया है।
CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई
नियुक्ति घोटाले से जुड़ी CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पहले कुल 22 परीक्षाओं को रद्द करने और छह परीक्षाओं की प्रक्रिया को स्थगित करने का आदेश दिया गया था।
इसके बाद नियुक्तियों में अनियमितता की आशंका वाले पुराने मामलों को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है। इसी क्रम में जारी आदेश (6-लो0से0आ0-01-07/का-5406) के तहत 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया है।
सरकार का यह कदम वर्ष 2014 से हुई नियुक्तियों की प्रक्रिया की जांच से जुड़ा है।
JPSC-6 परीक्षा भी जांच के दायरे में
जांच के दायरे में शामिल 17 परीक्षाओं में JPSC-6 भी शामिल है। इसी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से राज्य प्रशासनिक सेवा के पद पर कई अभ्यर्थियों का चयन हुआ था।
दिए गए विवरण के अनुसार, JPSC-6 से झारखंड लोक सेवा आयोग की पूर्व सदस्य अनिमा हांसदा की बेटी क्रिस्टीना का भी राज्य प्रशासनिक सेवा के पद पर चयन हुआ है।
इसके अलावा बीजेपी नेता बाबूलाल मरांडी के करीबी रिश्तेदार बताए जाने वाले अमित किस्कू का नाम भी इसी परीक्षा के चयनित अभ्यर्थियों में बताया गया है।
जांच के दायरे में आने का मतलब क्या है?
किसी परीक्षा या नियुक्ति प्रक्रिया को जांच के दायरे में शामिल किए जाने का अर्थ यह है कि संबंधित प्रक्रिया में संभावित अनियमितताओं की जांच की जा रही है। केवल जांच के दायरे में किसी व्यक्ति का नाम आने से उसके खिलाफ अनियमितता या दोष साबित नहीं होता।
JPSC-6 को भी 17 परीक्षाओं की सूची में शामिल किए जाने के बाद इस परीक्षा से जुड़ी नियुक्तियों की प्रक्रिया की जांच की जाएगी। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई का निर्णय लिया जा सकता है।
राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2014 से हुई नियुक्तियों को जांच के दायरे में शामिल किए जाने के बाद नियुक्ति प्रक्रियाओं की पारदर्शिता और अनियमितताओं की जांच का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है।