झारखंड में हाथियों के मिले 3 नए रास्ते, दलमा से दुमका और रामगढ़ तक कर रहे विचरण
- By rakesh --
- 01 Nov 2026 --
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रांची: झारखंड में हाथियों की आवाजाही के तीन नए कॉरिडोर सामने आए हैं। इन नए मार्गों के जरिए हाथियों के झुंड दलमा से निकलकर रांची, लोहरदगा, गिरिडीह और हजारीबाग होते हुए दुमका तक पहुंच रहे हैं। वहीं, एक अन्य मार्ग से गिरिडीह और बोकारो के रास्ते रामगढ़ तक भी हाथियों का विचरण हो रहा है। सितंबर में मानसून समाप्त होने के बाद जंगलों की सैटेलाइट और डिजिटल तस्वीरों के विश्लेषण से इन मार्गों की पुष्टि हुई है।
खास बात यह है कि लगातार पांचवें साल इन इलाकों में 30 से अधिक हाथियों का झुंड विचरण करता हुआ पाया गया है। वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, खनन, सड़क निर्माण और दूसरी मानवीय गतिविधियों के कारण हाथियों के पारंपरिक आवागमन वाले रास्तों पर दबाव बढ़ा है। ऐसे में नए कॉरिडोर हाथियों के सुरक्षित विचरण और उनके संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
दलमा से दुमका और रामगढ़ तक हाथियों की आवाजाही
झारखंड में हाथियों के विचरण के नए मार्गों में दलमा से रांची और लोहरदगा होते हुए गिरिडीह-हजारीबाग के रास्ते दुमका तक का कॉरिडोर शामिल है। इसके अलावा गिरिडीह और बोकारो के रास्ते रामगढ़ तक भी हाथियों की आवाजाही दर्ज की गई है।
सितंबर में मानसून की समाप्ति के बाद जंगलों की सैटेलाइट और डिजिटल तस्वीरों का अध्ययन किया गया। इसी प्रक्रिया में हाथियों की आवाजाही के इन तीन नए मार्गों की पुष्टि हुई। इन क्षेत्रों में लगातार पांच साल से 30 से अधिक हाथियों के झुंड का विचरण मिलना भी इस बदलाव की अहम कड़ी माना जा रहा है।
खनन और सड़क निर्माण से बदले हाथियों के पारंपरिक रास्ते
वन्यजीव विशेषज्ञ शहजाद आलम के अनुसार, खनन और सड़क निर्माण जैसी गतिविधियों के कारण हाथियों के पारंपरिक कॉरिडोर प्रभावित हुए हैं। इन गतिविधियों से उनके पुराने रास्तों पर आवाजाही बाधित हुई है। ऐसे में हाथियों ने नए मार्गों से आवागमन शुरू किया है।
आलम का मानना है कि नए रास्ते हाथियों के जीवन की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। इन कॉरिडोर में भोजन की पर्याप्त उपलब्धता भी बताई गई है, जिससे हाथियों को विचरण के दौरान भोजन की तलाश में ज्यादा परेशानी नहीं होती।
नए कॉरिडोर में औद्योगिक गतिविधियां कम, रात में रहती है शांति
नए पहचाने गए रास्तों की एक खासियत यह है कि इनके आसपास औद्योगिक और खनन गतिविधियां अपेक्षाकृत कम हैं। रात के समय इन इलाकों में शांति रहती है, जिससे हाथियों की आवाजाही में कम परेशानी होती है।
पूर्व प्रधान मुख्य वन संरक्षक नरेन्द्र मिश्रा ने बताया कि हजारीबाग के पास रांची-पटना नेशनल हाईवे पर बने डिवाइडर को छोड़ दें, तो हाथियों के आवागमन में कोई बड़ी बाधा नहीं है। उनके अनुसार, हाथियों की आवाजाही दुमका से रामगढ़ तक हो रही है।
2022 से 2026 तक हाथियों की संख्या में कमी नहीं
नरेन्द्र मिश्रा ने नए कॉरिडोर के संरक्षण पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि इन मार्गों पर तोड़फोड़ की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, ताकि हाथियों की आवाजाही प्रभावित न हो। उनके मुताबिक, वर्ष 2022 से 2026 के बीच हाथियों की संख्या में कमी नहीं आई है। इसके पीछे नए कॉरिडोर की भूमिका हो सकती है।
राज्य सरकार के अनुसार, झारखंड के जंगलों में फिलहाल करीब 600 हाथी हैं। हालांकि, दो साल पहले केंद्र सरकार की ओर से की गई गणना में हाथियों की संख्या को लेकर अंतर बताया गया है। ऐसे में राज्य और केंद्र के आंकड़ों में अंतर की वजह स्पष्ट होना भी जरूरी है।
हाथियों के संरक्षण के लिए कॉरिडोर बचाना जरूरी
झारखंड में हाथियों की आवाजाही के नए रास्ते सामने आने के बाद इनके संरक्षण का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के प्राकृतिक आवागमन वाले क्षेत्रों को सुरक्षित रखना जरूरी है। खनन, सड़क निर्माण और अन्य गतिविधियों के कारण इन रास्तों में बाधा आने पर मानव-हाथी संघर्ष की आशंका भी बढ़ सकती है।
फिलहाल, नए कॉरिडोर की पहचान हाथियों के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी है। इन मार्गों पर प्राकृतिक आवास और भोजन की उपलब्धता बनाए रखना तथा मानवीय गतिविधियों से होने वाली बाधाओं को रोकना इनके सुरक्षित विचरण के लिए अहम होगा।
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