CISF Restructuring: रांची के IG को 22 कोयला इकाइयों की कमान

CISF Command Reshuffle: स्टील, कोयला और बिजली इकाइयों के लिए नई कमान व्यवस्था, किसे मिली जिम्मेदारी?

रांची: केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के प्रशासनिक कमान ढांचे में बड़े फेरबदल की जानकारी सामने आई है। औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से स्टील, कोयला और बिजली क्षेत्रों की सुरक्षा इकाइयों को क्षेत्रीय आधार पर पुनर्गठित किया जा रहा है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नए ढांचे के तहत देश की 22 महत्वपूर्ण कोयला इकाइयों का प्रशासनिक नियंत्रण रांची स्थित पूर्वी खंड के महानिरीक्षक प्रबोध चंद्रा को सौंपे जाने की बात कही गई है। हालांकि, इस बदलाव की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर झारखंड समेत देश के विभिन्न कोयला क्षेत्रों में सुरक्षा निगरानी और आपसी समन्वय मजबूत होने की उम्मीद है।

रांची के नियंत्रण में आएंगी 22 कोयला इकाइयां

प्रस्तावित पुनर्गठन के तहत भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL), धनबाद, सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL), करगली तथा मगध-आम्रपाली जैसी प्रमुख कोयला इकाइयों को रांची मुख्यालय से जोड़ने की जानकारी दी गई है।

इसके अलावा साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL), बिलासपुर, ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL), शीतलपुर, कोल माइनिंग हजारीबाग, नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL), सिंगरौली और नेवेली समेत कुल 22 कोयला इकाइयों को पूर्वी खंड रांची के महानिरीक्षक के प्रत्यक्ष प्रशासनिक नियंत्रण में लाए जाने की बात कही गई है।

इस बदलाव का उद्देश्य कोयला क्षेत्रों में सुरक्षा संबंधी चुनौतियों से निपटने, अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने और अधिकारियों के बीच समन्वय बेहतर करने से जुड़ा बताया जा रहा है।

इस्पात क्षेत्र की 27 इकाइयों की जिम्मेदारी पीयूष पांडेय को

प्रशासनिक फेरबदल के तहत इस्पात क्षेत्र की 27 औद्योगिक इकाइयों की जिम्मेदारी सेंट्रल सेक्टर भिलाई के महानिरीक्षक पीयूष पांडेय को सौंपे जाने की जानकारी है।

इन इकाइयों में बोकारो, भिलाई, राउरकेला, दुर्गापुर, बर्नपुर और सलेम जैसे प्रमुख इस्पात संयंत्रों की सुरक्षा शामिल है। क्षेत्रीय आधार पर कमान तय करने से इन औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप निगरानी और प्रशासनिक समन्वय बेहतर बनाने का लक्ष्य है।

हालांकि, इस जिम्मेदारी के हस्तांतरण की आधिकारिक पुष्टि भी संबंधित आदेश की उपलब्धता पर निर्भर करेगी।

बिजली क्षेत्र की करीब 54 इकाइयां भी नए ढांचे में शामिल

बिजली क्षेत्र की लगभग 54 इकाइयों का प्रशासनिक दायित्व नॉर्थ ईस्ट सेक्टर जोन-1, कोलकाता के महानिरीक्षक ए.के. मोहनका को दिए जाने की जानकारी सामने आई है।

इस क्षेत्र में चंद्रपुरा, बोकारो थर्मल, ललपनिया, कोडरमा, पतरातू और बक्सर जैसे महत्वपूर्ण बिजली संयंत्र शामिल बताए गए हैं। बिजली उत्पादन से जुड़े प्रतिष्ठानों की सुरक्षा औद्योगिक और ऊर्जा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

प्रस्तावित बदलाव के जरिए बिजली क्षेत्र की सुरक्षा इकाइयों के संचालन और क्षेत्रीय निगरानी को अधिक व्यवस्थित बनाने का प्रयास किया जा सकता है।

क्षेत्रीय कमान से त्वरित निर्णय पर जोर

इस पुनर्गठन का प्रमुख उद्देश्य क्षेत्रीय स्तर पर सुरक्षा प्रबंधन और प्रशासनिक समन्वय को प्रभावी बनाना बताया जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने पर महानिरीक्षक और उप-महानिरीक्षक स्तर के अधिकारियों को संबंधित औद्योगिक क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप काम करने का अवसर मिल सकता है।

इससे सुरक्षा संबंधी घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने, अधिकारियों के बीच तालमेल बनाने और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की निगरानी में तेजी आने की संभावना है।

फिलहाल, कमान में बदलाव से जुड़ी जानकारी की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। अंतिम आदेश और उसकी प्रभावी तारीख स्पष्ट होने के बाद ही नई व्यवस्था के लागू होने की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

यह भी पढ़ें: Jharkhand Asur Tribe: दुर्गा पूजा में शोक क्यों मनाती है असुर जनजाति? जानें महिषासुर से जुड़ी मान्यता