Champai Soren on SIR: चंपई सोरेन ने SIR के विरोध पर उठाए सवाल, घुसपैठ का मुद्दा उठाया
- By rakesh --
- 30 Sep 2026 --
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रांची: झारखंड में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता चंपई सोरेन ने SIR का विरोध कर रहे सत्तारूढ़ झामुमो-कांग्रेस गठबंधन पर निशाना साधा है। उन्होंने SIR को चुनाव आयोग की नियमित प्रक्रिया बताते हुए इसे झारखंड के नागरिकों के अधिकारों और मतदाता सूची की शुद्धता से जोड़कर अपनी बात रखी।
चंपई सोरेन ने आरोप लगाया कि SIR को लेकर विपक्ष की ओर से भ्रम फैलाया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह प्रक्रिया किसी वर्ग के खिलाफ नहीं है, बल्कि मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम सुनिश्चित करने और अपात्र प्रविष्टियों की पहचान करने से संबंधित है।
चुनाव आयोग के आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक झारखंड में SIR की क्वालिफाइंग डेट 1 अक्टूबर 2026 रखी गई है। ड्राफ्ट मतदाता सूची 5 अगस्त को प्रकाशित हुई थी और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया 4 सितंबर तक निर्धारित थी। अंतिम मतदाता सूची 7 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जानी है।
आदिवासी आबादी में बदलाव का आंकड़ा रखे
चंपई सोरेन ने अपने बयान में झारखंड की जनसांख्यिकी में बदलाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 1951 में राज्य क्षेत्र में आदिवासी आबादी का हिस्सा 44 प्रतिशत था, जो 2011 की जनगणना में घटकर 28 प्रतिशत रह गया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने इस बदलाव को कथित घुसपैठ से जोड़ते हुए कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि संथाल परगना के अलावा राज्य के दूसरे हिस्सों में भी जनसांख्यिकीय बदलाव देखने को मिल रहा है। पाकुड़, राजमहल और साहिबगंज का उदाहरण देते हुए उन्होंने आदिवासी जमीनों पर कथित कब्जे और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया।
हालांकि, आबादी में बदलाव के आंकड़े और उसके कारणों की व्याख्या अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय है। चंपई सोरेन ने इसे घुसपैठ से जोड़कर अपनी राजनीतिक चिंता व्यक्त की है।
चाकुलिया और कपाली का भी किया जिक्र
चंपई सोरेन ने पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने के कथित मामले का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में फर्जी प्रमाण पत्र जारी होने के बावजूद मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
इसी तरह उन्होंने सरायकेला-खरसावां की कपाली पंचायत का उदाहरण देते हुए वहां की मतदाता संख्या और जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर सवाल उठाए। कपाली को लेकर चंपई सोरेन पहले भी जनसांख्यिकी में बदलाव और कथित घुसपैठ के आरोप लगा चुके हैं।
इन दावों को फिलहाल चंपई सोरेन के राजनीतिक आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। संबंधित आंकड़ों और उनके कारणों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अलग से आवश्यक है।
SIR में दस्तावेज और दावा-आपत्ति की प्रक्रिया
SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम और पात्रता की जांच के लिए दस्तावेजी प्रक्रिया अपनाई जा रही है। चुनाव आयोग के अनुसार झारखंड में 1 अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले और अन्य निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले भारतीय नागरिक मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं। दूसरे राज्यों में जन्मे लेकिन झारखंड में रहने वाले मतदाता संबंधित राज्य के सक्षम प्राधिकरण से जारी वैध दस्तावेज भी सत्यापन के लिए दे सकते हैं।
SIR के दौरान फर्जी दस्तावेजों से जुड़े मामले भी सामने आए हैं। सितंबर में पाकुड़ के बरहरवा क्षेत्र में मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल को लेकर FIR दर्ज की गई थी।
चुनाव आयोग की वेबसाइट पर SIR 2026 के तहत मतदाता अपने नाम को पिछले SIR के रिकॉर्ड में खोजने और संबंधित चुनावी सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।
योग्य मतदाताओं से प्रक्रिया पूरी करने की अपील
चंपई सोरेन ने कहा कि यदि किसी योग्य मतदाता का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा या आपत्ति दर्ज करनी चाहिए। उन्होंने SIR को मतदाता सूची को व्यवस्थित करने और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करने की प्रक्रिया के तौर पर देखने की अपील की।
वहीं, SIR को लेकर झारखंड में राजनीतिक दलों के बीच मतभेद जारी हैं। एक तरफ इसके समर्थन में फर्जी और अपात्र प्रविष्टियों की जांच की बात कही जा रही है, जबकि विरोध करने वाले दल प्रक्रिया और इसके संभावित प्रभावों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। अंतिम मतदाता सूची 7 अक्टूबर को प्रकाशित होने के बाद प्रक्रिया का अगला आधिकारिक चरण स्पष्ट होगा।
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