Ranchi News: परिसीमन में आरक्षित सीटों के प्रभावित होने की आशंका, 30 अगस्त को आदिवासी महाजुटान
- By rakesh --
- 28 Aug 2026 --
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रांची: प्रस्तावित परिसीमन की प्रक्रिया में आदिवासियों के लिए आरक्षित लोकसभा और विधानसभा सीटों के प्रभावित होने की आशंका को लेकर 30 अगस्त को रांची में आदिवासी एकता महाजुटान आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम का आह्वान विभिन्न आदिवासी संगठनों की ओर से किया गया है।
शुक्रवार को प्रेस क्लब में आदिवासी समन्वय समिति के संयोजक लक्ष्मी नारायण मुंडा, केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की और सामाजिक कार्यकर्ता अनिल उरांव ने संवाददाता सम्मेलन कर महाजुटान की जानकारी दी।
परिसीमन की प्रक्रिया और संभावित प्रभाव पर चिंता
वक्ताओं ने कहा कि देश में प्रस्तावित परिसीमन जनसंख्या के आधार पर किया जाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि झारखंड में परिसीमन का विरोध नहीं किया जा रहा है, बल्कि इसकी प्रक्रिया और इसके संभावित प्रभावों को लेकर चिंता है।
वक्ताओं ने आशंका जताई कि परिसीमन की आड़ में आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या कम करने का प्रयास हो सकता है। केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की ने कहा कि यदि आरक्षित सीटों में कमी आती है तो आदिवासी समुदायों की राजनीतिक भागीदारी प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभा में आदिवासी प्रतिनिधित्व कम होने की स्थिति में समुदाय के राजनीतिक अधिकार प्रभावित होंगे। ऐसे में झारखंड के आदिवासियों के राजनीतिक अधिकार और प्रतिनिधित्व को सुरक्षित रखना जरूरी है।
24 जिलों से लोगों के शामिल होने का दावा
आयोजकों के अनुसार, 30 अगस्त को होने वाले आदिवासी महाजुटान में झारखंड के सभी 24 जिलों से लोग शामिल होंगे। इसके लिए विभिन्न आदिवासी संगठनों की ओर से तैयारी की जा रही है।
वक्ताओं ने बताया कि महाजुटान में सभी धर्मों और राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों को भी आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम किसी एक राजनीतिक दल के विरोध में आयोजित नहीं किया जा रहा है।
आयोजकों के मुताबिक, महाजुटान का मुख्य मुद्दा आदिवासियों के राजनीतिक अधिकार, प्रतिनिधित्व और आरक्षित सीटों से जुड़ी चिंताओं को उठाना है।
शेड्यूल एरिया और विस्थापन का मुद्दा भी उठाया
संवाददाता सम्मेलन के दौरान झारखंड के शेड्यूल एरिया में आदिवासी अधिकारों और जनसांख्यिकीय बदलाव का मुद्दा भी उठाया गया। वक्ताओं ने दावा किया कि राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में गैर-आदिवासियों की संख्या बढ़ी है।
उन्होंने विकास के नाम पर शेड्यूल एरिया में विस्थापन की स्थिति पैदा होने की बात कही। इस दौरान संविधान की पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों का हवाला देते हुए आदिवासी क्षेत्रों के धार्मिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक अधिकारों की रक्षा की मांग की गई।
CNT और SPT एक्ट के उल्लंघन का भी आरोप
वक्ताओं ने आरोप लगाया कि आदिवासी क्षेत्रों में CNT और SPT एक्ट के प्रावधानों का भी उल्लंघन किया गया है। उन्होंने पिछले 75 वर्षों के दौरान आदिवासी क्षेत्रों में हुए कथित नुकसान और विस्थापन को लेकर सरकार से जवाब मांगा।
वक्ताओं ने सवाल उठाया कि आदिवासी क्षेत्रों में हुए कथित नुकसान और विस्थापन की भरपाई कौन करेगा। उन्होंने सरकार से इन मुद्दों पर जवाब देने और आदिवासियों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।