JSSC CGL नियुक्ति विवाद: 1932 कर्मियों को नौकरी वापस मिली, अब वेतन भुगतान पर नया पेंच
- By rakesh --
- 02 Sep 2026 --
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रांची। झारखंड में JSSC CGL के जरिए नियुक्त अभ्यर्थियों की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। नियुक्ति रद्द होने के बाद हाईकोर्ट से राहत मिलने पर करीब 1932 चयनित कर्मियों की नौकरी बहाल हुई है। हालांकि, अब कई कर्मचारियों के सामने वेतन भुगतान की समस्या खड़ी हो गई है।
कर्मियों के अनुसार, कोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने दोबारा अपने पद पर योगदान तो दे दिया है, लेकिन नियुक्ति और री-ज्वाइनिंग को लेकर विभागीय स्तर पर स्पष्ट आदेश का इंतजार है। इसी कारण कई कर्मचारियों के वेतन भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।
पहले नियुक्ति रद्द हुई, फिर हाईकोर्ट से मिली राहत
मामला JSSC CGL के माध्यम से विभिन्न पदों पर हुई नियुक्तियों से जुड़ा है। इनमें प्रशाखा पदाधिकारी, कनीय सचिवालय सहायक, सर्किल इंस्पेक्टर, ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर, ब्लॉक वेलफेयर ऑफिसर, लेबर एनफोर्समेंट ऑफिसर और फूड सप्लाई ऑफिसर समेत कई पद शामिल हैं।
17 अगस्त 2026 को झारखंड सरकार की विशेष कैबिनेट बैठक में नियुक्तियां रद्द करने का फैसला लिया गया था। इसके बाद करीब 1932 चयनित कर्मियों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया और मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा।
20 अगस्त 2026 को हाईकोर्ट ने सरकार के नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने अपने आदेश में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किए जाने को लेकर चयनित अभ्यर्थियों को राहत दी।
इसके बाद 23 अगस्त से कर्मचारियों की दोबारा अपने पद पर योगदान देने की प्रक्रिया शुरू हुई। कर्मचारियों ने संबंधित पदों पर योगदान भी दिया, लेकिन अब वेतन भुगतान को लेकर नया विवाद सामने आया है।
बहाली के बाद वेतन भुगतान पर अटका मामला
कर्मियों का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने अपने-अपने पद पर योगदान कर दिया है, लेकिन कार्मिक विभाग की ओर से नियुक्ति और री-ज्वाइनिंग को लेकर स्पष्ट आधिकारिक पत्र अभी जारी नहीं हुआ है।
कर्मियों के मुताबिक, जब तक कार्मिक विभाग उनकी बहाली और नियुक्ति की स्थिति को स्पष्ट करते हुए औपचारिक आदेश जारी नहीं करता, तब तक संबंधित विभागों में वेतन भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ाना मुश्किल है।
यही वजह है कि नौकरी वापस मिलने के बाद अब JSSC CGL से नियुक्त कर्मचारियों के सामने वेतन भुगतान का मुद्दा खड़ा हो गया है।
नियुक्ति रद्द और नौकरी खत्म करने के बीच क्या है पेंच?
पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल नियुक्ति रद्द किए जाने और नौकरी खत्म किए जाने के बीच के अंतर को लेकर है। कर्मचारियों का कहना है कि कार्मिक विभाग की ओर से उनकी सेवा समाप्ति का अलग आदेश जारी नहीं किया गया था, बल्कि नियुक्ति रद्द की गई थी।
अब हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद कर्मचारियों ने दोबारा योगदान कर लिया है। ऐसे में उनकी री-ज्वाइनिंग किस प्रशासनिक आदेश के आधार पर मानी जाए और वेतन भुगतान की प्रक्रिया किस आदेश के तहत शुरू हो, यह सवाल विभाग के सामने है।
कर्मियों के अनुसार, मुख्यमंत्री की अनुशंसा के बाद कार्मिक विभाग की ओर से री-ज्वाइनिंग के संबंध में औपचारिक पत्र जारी होने की संभावना है। इसके बाद ही वेतन भुगतान का रास्ता स्पष्ट हो सकता है।
JSSC CGL मामले में CID जांच जारी
दूसरी ओर, JSSC CGL मामले में CID की जांच भी जारी है। जांच एजेंसी चयनित अभ्यर्थियों से पूछताछ कर रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब तक 150 से अधिक चयनित कर्मियों से पूछताछ की जा चुकी है।
मामले में CID ने पांच सफल अभ्यर्थियों को गिरफ्तार भी किया है। जांच एजेंसी की योजना JSSC CGL के जरिए नियुक्त सभी 1932 कर्मियों से पूछताछ करने की है। इसके बाद जांच के निष्कर्षों के आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
15 सितंबर को हाईकोर्ट में अहम सुनवाई
JSSC CGL नियुक्ति मामले में अब 15 सितंबर 2026 को हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। अदालत ने इस तारीख तक अभ्यर्थियों और राज्य सरकार को अपना-अपना एफिडेविट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
फिलहाल 1932 चयनित कर्मियों को नियुक्ति बहाली के मामले में अंतरिम राहत मिल चुकी है, लेकिन कई कर्मचारियों के लिए वेतन भुगतान का मुद्दा अभी बना हुआ है। वहीं, दूसरी ओर CID की जांच भी जारी है।
अब 15 सितंबर की सुनवाई पर सभी की नजर है। इस सुनवाई के बाद नियुक्ति, वेतन भुगतान और CID जांच से जुड़े मामलों की स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
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