बर्न्ट लाइम जांच रिपोर्ट में हेरफेर का मामला, हाईकोर्ट ने रद्द किया बहाली का आदेश
- By rakesh --
- 30 Oct 2026 --
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रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL), जादूगोड़ा की महिला कर्मचारी थानुश्री नायक की बर्खास्तगी को सही ठहराया है। कोर्ट ने केंद्रीय औद्योगिक न्यायाधिकरण, धनबाद के 21 जनवरी 2015 के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें कर्मचारी की बर्खास्तगी को अवैध बताते हुए उन्हें नौकरी में वापस लेने और बकाया वेतन समेत अन्य वित्तीय लाभ देने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने यूसीआइएल की ओर से दायर रिट याचिका स्वीकार करते हुए कंपनी के बर्खास्तगी आदेश को बहाल कर दिया।
जांच रिपोर्ट में हेरफेर को माना गंभीर कदाचार
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि थानुश्री नायक पर बर्न्ट लाइम की रासायनिक जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी करने का आरोप था। कोर्ट के अनुसार, जांच के परिणामों में कथित हेरफेर से कंपनी को आर्थिक नुकसान हुआ था। अदालत ने विभागीय जांच को निष्पक्ष माना और कहा कि जांच अधिकारी के निष्कर्ष दस्तावेजों तथा गवाहों के बयानों पर आधारित थे।
कोर्ट ने अपने फैसले में माना कि रासायनिक जांच के परिणामों में बदलाव कर किसी सप्लायर को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाना गंभीर कदाचार है। ऐसे मामले में बर्खास्तगी की सजा को असंगत नहीं कहा जा सकता।
प्रयोगशाला में बर्न्ट लाइम की जांच की थी जिम्मेदारी
मामले के अनुसार, थानुश्री नायक यूसीआइएल में साइंटिफिक असिस्टेंट ग्रेड-एक के पद पर कार्यरत थीं। उनकी जिम्मेदारी प्रयोगशाला में बर्न्ट लाइम का रासायनिक विश्लेषण करना, उसकी रिपोर्ट तैयार करना और उसे सहायक अधीक्षक के पास भेजना था।
विभागीय जांच में आरोप लगाया गया कि तीन दिसंबर 2007 से 18 अप्रैल 2008 के बीच उन्होंने बर्न्ट लाइम के लगभग 60 से 65 प्रतिशत नमूनों की जांच रिपोर्ट में कथित तौर पर हेरफेर किया। रिपोर्ट में कैल्शियम ऑक्साइड की मात्रा वास्तविक स्तर से अधिक दर्ज किए जाने की बात सामने आई थी।
श्याम केमिकल्स को लाभ पहुंचाने का था आरोप
बर्न्ट लाइम की गुणवत्ता के आधार पर ही कंपनी संबंधित सप्लायर को भुगतान करती थी। आरोप था कि जांच रिपोर्ट में बदलाव कर कम गुणवत्ता वाले बर्न्ट लाइम की आपूर्ति करने वाले मेसर्स श्याम केमिकल्स को अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाया गया। इससे यूसीआइएल को वित्तीय नुकसान होने की बात कही गई थी।
इस मामले में कंपनी ने विभागीय जांच कराई थी। जांच के बाद थानुश्री नायक को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इसके बाद कर्मचारी ने बर्खास्तगी के फैसले को चुनौती देते हुए केंद्रीय औद्योगिक न्यायाधिकरण, धनबाद का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने निरस्त किया 2015 का आदेश
केंद्रीय औद्योगिक न्यायाधिकरण ने 21 जनवरी 2015 को बर्खास्तगी को अवैध करार दिया था। न्यायाधिकरण ने थानुश्री नायक को सेवा में बहाल करने के साथ बकाया वेतन और अन्य वित्तीय लाभ देने का निर्देश दिया था।
न्यायाधिकरण के इस फैसले के खिलाफ यूसीआइएल ने झारखंड हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने कंपनी की याचिका स्वीकार करते हुए न्यायाधिकरण का आदेश रद्द कर दिया और कर्मचारी की बर्खास्तगी को बरकरार रखा।
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