झारखंड में JPSC की 9 परीक्षाओं पर सवाल, CID की चार्जशीट में गंभीर आरोप

झारखंड में JPSC की 9 परीक्षाओं पर सवाल, CID की चार्जशीट में गंभीर आरोप

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर सीआईडी की जांच चर्चा में है। चार्जशीट में आयोग की 36 परीक्षाओं में से नौ में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है। बाकी परीक्षाओं से जुड़े मामलों की जांच जारी बताई गई है।

जांच से जुड़े विवरण में जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते, तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कथित नेटवर्क ने परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित किया और कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया। चार्जशीट में पेपर लीक, ओएमआर शीट में बदलाव, खाली गोले बाद में भरने और परीक्षा केंद्र से बाहर उत्तर लिखवाने जैसे आरोपों का उल्लेख है।

36 में से 9 परीक्षाएं जांच के दायरे में

सीआईडी की चार्जशीट के अनुसार, जिन परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के साक्ष्य मिले हैं, उनमें संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा, वन क्षेत्र पदाधिकारी, सहायक वन संरक्षक, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, झारखंड पात्रता परीक्षा, सहायक लोक अभियोजक और खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी की परीक्षाएं शामिल हैं।

जांच में कथित अवैध लेन-देन और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप भी सामने आए हैं। इन आरोपों की पुष्टि और संबंधित लोगों की जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा में अंकों में हेराफेरी का आरोप

11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा, विज्ञापन संख्या 01/2024, के तहत 342 पदों पर नियुक्तियां हुई थीं। चार्जशीट से जुड़े विवरण में साक्षात्कार के दौरान कोडिंग-डिकोडिंग के जरिए अंकों में कथित हेराफेरी के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।

जांचकर्ताओं के अनुसार, पूर्व अध्यक्ष के आवास से 15 अभ्यर्थियों के नाम और रोल नंबर से जुड़ी सामग्री मिली। आरोप है कि इसमें जेएएस, जेपीएस और आईएफएस जैसे पदों पर नियुक्ति के लिए अनुशंसा से संबंधित विवरण मौजूद थे।

14वीं संयुक्त असैनिक सेवा परीक्षा में OMR शीट पर सवाल

14वीं झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 में 103 पदों के मुकाबले 2,204 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया था। चार्जशीट में स्ट्रांग रूम में बिना सील रखी गई ओएमआर शीट, खाली गोले भरे जाने और अयोग्य अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण कराने के आरोपों का उल्लेख है। गिरफ्तार अभ्यर्थी सुमन सौरभ का मामला भी जांच के संदर्भ में सामने आया है।

FRO और ACF परीक्षाओं में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच

वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO) परीक्षा 170 पदों के लिए आयोजित की गई थी। आरोप है कि मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं गुप्त ठिकानों पर लिखवाई गईं। इस संबंध में वीडियो रिकॉर्डिंग जब्त किए जाने की बात भी चार्जशीट से जुड़े विवरण में कही गई है।

सहायक वन संरक्षक (ACF) परीक्षा के 78 पदों से संबंधित मामले में कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। जांच विवरण के अनुसार, एक आवास से मॉडल उत्तर बरामद हुए, जिनका फोरेंसिक जांच में उत्तर पुस्तिका से मिलान किए जाने का दावा है।

CDPO और JET परीक्षा में भी उठे सवाल

बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) परीक्षा में 64 पदों के लिए चयन प्रक्रिया हुई थी। आरोप है कि डेटा प्रोसेसिंग और अभ्यर्थियों के चयन में अनियमितताएं हुईं। चार्जशीट में परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी टीडीपीएल की भूमिका की भी जांच का उल्लेख है।

झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) 2024 के संबंध में परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी बिंसिस एजेंसी को दिए जाने पर सवाल उठाए गए हैं। उपलब्ध विवरण में कहा गया है कि एजेंसी के निदेशक अरुण कुमार पहले जेएसएससी पेपर लीक मामले में जेल जा चुके थे। इसके बावजूद एजेंसी को परीक्षा संचालन का काम सौंपे जाने का उल्लेख जांच के संदर्भ में किया गया है।

सहायक लोक अभियोजक और FSO परीक्षा भी जांच में शामिल

सहायक लोक अभियोजक की नियमित और बैकलॉग प्रारंभिक परीक्षाओं में कुछ अभ्यर्थियों के कंप्यूटर प्रमाणपत्रों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि कुछ प्रमाणपत्र फर्जी थे या दूसरे राज्यों से जारी किए गए थे। बैकलॉग परीक्षा के संचालन में भी टीडीपीएल का नाम सामने आया है।

खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी (FSO) परीक्षा के परिणाम तैयार करने में कथित अनियमितताओं की भी जांच की गई है। चार्जशीट से जुड़े विवरण में मुख्य आरोपी बताए गए अभय तिवारी के लिखित परीक्षा पास कर साक्षात्कार तक पहुंचने का उल्लेख है।

अन्य आरोपियों और परीक्षाओं की जांच जारी

सीआईडी कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों और बाकी परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य आरोपों से जुड़े साक्ष्यों, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और कथित वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को स्पष्ट करना है।

इस मामले में चार्जशीट में लगाए गए आरोपों को अदालत में सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। संबंधित व्यक्तियों की कानूनी जिम्मेदारी का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।

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