Jharkhand Film Industry: असीम सिन्हा बोले- स्थानीय सिनेमा को ग्लोबल पहचान दिलाने की पूरी संभावना
- By rakesh --
- 23 Aug 2026 --
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रांची: झारखंड में स्थानीय सिनेमा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की पूरी संभावना है। इसके लिए शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी सिनेमा के लिए सकारात्मक माहौल और बेहतर सुविधाएं विकसित करने की जरूरत है।
मशहूर फिल्म एडिटर और फिल्मकार असीम सिन्हा ने सूचना भवन के सभागार में झारखंड फिल्म विकास निगम लिमिटेड (जेएफडीसीएल) की ओर से आयोजित ‘मीट द मेंटर’ कार्यक्रम में यह बात कही।
असीम सिन्हा ने कहा कि झारखंड जैसे राज्य में फिल्म उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए केवल वित्तीय सहायता पर्याप्त नहीं है। इसके साथ सिनेमा के लिए जरूरी आधारभूत ढांचे और ग्रामीण क्षेत्रों में सिनेमा संस्कृति को बढ़ावा देना भी जरूरी है।
स्थानीय कलाकारों और प्रतिभाओं को मिले अवसर
असीम सिन्हा ने क्षेत्रीय कलाकारों को फिल्मों में अवसर देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्थानीय फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए सीड फंडिंग की व्यवस्था होनी चाहिए।
उन्होंने फिल्म और स्क्रिप्ट के मूल्यांकन के लिए मजबूत व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता भी बताई। इसके लिए बेहतर मेंटरिंग व्यवस्था को जरूरी बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे नए फिल्मकारों और कलाकारों को सही दिशा मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों को और गति देने की जरूरत है, ताकि राज्य का फिल्म उद्योग दक्षिण भारतीय राज्यों और देश के अन्य विकसित फिल्म उद्योगों की तरह आगे बढ़ सके।
स्थानीय भाषा और कला को प्राथमिकता देने पर जोर
असीम सिन्हा ने कहा कि झारखंड की स्थानीय भाषा, कला और प्रतिभाओं को प्राथमिकता देने से यहां की फिल्मों को वैश्विक स्तर पर पहचान मिल सकती है।
उन्होंने अपने संघर्ष के दिनों और फिल्म एडिटिंग के क्षेत्र में आए तकनीकी बदलावों से जुड़े अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि सीखने की प्रक्रिया कभी खत्म नहीं होती और वह आज भी सीख रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने श्याम बेनेगल, अंशुल शर्मा, चंद्र प्रकाश द्विवेदी, पाकिस्तानी निर्देशक महरीन जब्बार, तिग्मांशु धूलिया, कल्पना लाजमी, केतन मेहता और कुंदन शाह जैसे फिल्मकारों के साथ काम करने के अनुभव भी साझा किए।
झारखंड में फिल्म इंस्टीट्यूट की स्थापना की इच्छा
असीम सिन्हा ने बताया कि पिछले 40 वर्षों से झारखंड में एक फिल्म इंस्टीट्यूट की स्थापना उनकी इच्छा रही है। उन्होंने कहा कि अब यह सपना साकार होता दिखाई दे रहा है।
उन्होंने बताया कि रांची में पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने मुंबई का रुख किया और वहां फिल्मों के संपादन के क्षेत्र में काम किया। वर्तमान में असीम सिन्हा 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की नॉन-फीचर फिल्म श्रेणी की जूरी के अध्यक्ष हैं।
100 से अधिक फिल्मों में किया संपादन
कार्यक्रम में विभाग के उपनिदेशक सैय्यद राशिद अख्तर ने असीम सिन्हा को शॉल और मोमेंटो देकर सम्मानित किया।
संयुक्त निदेशक श्री आनंद ने असीम सिन्हा के फिल्मी सफर पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने 100 से अधिक फिल्मों में संपादन का कार्य किया है और करीब 30 वर्षों तक इस क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए अपनी अलग पहचान बनाई है।
उन्होंने कहा कि असीम सिन्हा का अनुभव और योगदान झारखंड के उभरते फिल्म उद्योग के लिए प्रेरणास्रोत है।
कार्यक्रम में सहायक निदेशक श्री अभय कुमार, जेब अख्तर, अनुज कुमार, महेश माझी सहित फिल्म क्षेत्र से जुड़े कई लोग मौजूद रहे।
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