झारखंड में HRMS पोर्टल की समय-सीमा पर विवाद, 300 पुलिस अधिकारियों की प्रोन्नति पर संकट?

झारखंड में HRMS पोर्टल की समय-सीमा पर विवाद, 300 पुलिस अधिकारियों की प्रोन्नति पर संकट?

रांची: झारखंड में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की चल-अचल संपत्ति विवरणी जमा करने को लेकर मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) पोर्टल की समय-सीमा विवादों में घिर गई है। खासकर वरीय अधिकारियों को समय-सीमा में छूट मिलने और कनीय अधिकारियों को इस सुविधा से वंचित रखने के आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कर्मचारियों के बीच इस कथित दोहरे रवैये को लेकर नाराजगी बढ़ रही है।

कर्मचारियों का सवाल है कि जब एक ही पोर्टल पर वरीय अधिकारियों को सुविधाएं और अतिरिक्त अवसर मिल सकते हैं, तो कनीय अधिकारियों की छोटी-सी चूक पर सख्ती क्यों बरती जाती है? उनका मानना है कि प्रशासनिक व्यवस्था में सभी स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए।

HRMS पोर्टल का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों से जुड़े प्रशासनिक कार्यों को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाना है। इसके माध्यम से नियुक्ति, स्थानांतरण, प्रोन्नति, वेतन निर्धारण, एमएसीपी, अवकाश, निलंबन और अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसे आदेश जारी किए जा सकते हैं। पोर्टल से जारी आदेश संबंधित कर्मचारी की ई-सर्विस बुक में स्वतः दर्ज हो जाते हैं। इससे कर्मचारियों को सेवा संबंधी रिकॉर्ड के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, पोर्टल पर उपलब्ध सभी सुविधाओं का नियमित और समान रूप से इस्तेमाल नहीं होने के सवाल भी उठ रहे हैं।

प्रोन्नति के मामलों में अब तक पूरी तरह लागू नहीं हुई ऑनलाइन व्यवस्था

कार्मिक विभाग ने 27 मई 2025 को संकल्प जारी कर वित्तीय वर्ष 2025-26 से विजिलेंस क्लियरेंस इंफॉर्मेशन सिस्टम (VCIS) के माध्यम से पदाधिकारियों का निगरानी स्वच्छता प्रमाण-पत्र ऑनलाइन प्राप्त करने की व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया था। इसका उद्देश्य प्रोन्नति समेत अन्य सेवा संबंधी मामलों में अनावश्यक विलंब रोकना था।

हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह व्यवस्था अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सेवा संबंधी प्रक्रियाओं को ऑनलाइन और समयबद्ध बनाने के लिए निर्णय लिए गए हैं, तो उनका प्रभावी क्रियान्वयन क्यों नहीं हो रहा है।

APAR मूल्यांकन की समय-सीमा कई बार बढ़ाई गई

कार्मिक विभाग की वेबसाइट पर झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की वार्षिक कार्य निष्पादन मूल्यांकन रिपोर्ट (APAR) को ऑनलाइन अपलोड करने और मूल्यांकन पूरा करने से संबंधित कई वर्षों के आदेश उपलब्ध हैं। वर्ष 2021, 2022, 2023 और 2024 में इसके लिए समय-सीमा बढ़ाई गई थी।

वर्ष 2025 में भी 24 अप्रैल, 25 जून और 16 जुलाई को ऑनलाइन मूल्यांकन से संबंधित आदेश जारी किए गए। इसके बावजूद चालू वित्तीय वर्ष में समय-सीमा बढ़ाने को लेकर सख्ती बरते जाने की बात सामने आ रही है। इस अंतर को लेकर कर्मचारी सवाल उठा रहे हैं कि पहले जब समय बढ़ाने की व्यवस्था अपनाई जाती रही है, तो अब अतिरिक्त अवसर देने से परहेज क्यों किया जा रहा है।

संपत्ति विवरणी जमा करने की तारीख पहले भी बढ़ी थी

संपत्ति विवरणी जमा करने की समय-सीमा बढ़ाने का मामला भी नया नहीं है। वर्ष 2024 में वर्ष 2023 की संपत्ति विवरणी HRMS पोर्टल के माध्यम से जमा करने के लिए कार्मिक विभाग ने दो बार समय बढ़ाया था।

27 जून 2024 को जारी आदेश में अंतिम तिथि 31 जुलाई 2024 तक बढ़ाई गई थी। इसके बाद 20 अगस्त 2024 को एक और आदेश जारी कर विवरणी जमा करने की अवधि पांच सितंबर 2024 तक कर दी गई थी। इन आदेशों से स्पष्ट है कि पहले भी कर्मचारियों को अतिरिक्त समय देने की व्यवस्था अपनाई गई थी। ऐसे में मौजूदा मामले में समान अवसर की मांग तेज हो रही है।

वित्त मंत्री ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र

संपत्ति विवरणी जमा करने की समय-सीमा को लेकर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी हस्तक्षेप किया है। उन्होंने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर HRMS पोर्टल को प्रत्येक तीन महीने में सात दिनों के लिए खोलने पर विचार करने का आग्रह किया है। इसका उद्देश्य उन कर्मचारियों को विशेष परिस्थितियों में अतिरिक्त अवसर देना है, जो निर्धारित अवधि में अपनी विवरणी जमा नहीं कर पाते हैं।

यह मामला तब चर्चा में आया, जब करीब 300 पुलिस पदाधिकारियों के संपत्ति विवरणी जमा नहीं कर पाने की बात सामने आई। वित्त मंत्री ने कार्मिक सचिव के व्यवहार के कारण पुलिस पदाधिकारियों की प्रोन्नति प्रभावित होने की आशंका जताई है। उन्होंने मुख्य सचिव से मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है, ताकि किसी अधिकारी का सेवा संबंधी लाभ केवल पोर्टल पर विवरणी जमा करने में हुई देरी के कारण प्रभावित न हो।

HRMS पोर्टल पर उपलब्ध आदेशों को लेकर भी सवाल

कार्मिक विभाग की कार्यप्रणाली पर भी HRMS पोर्टल के रिकॉर्ड के आधार पर सवाल उठाए जा रहे हैं। पोर्टल पर नियुक्ति श्रेणी में वर्ष 2016 के बाद कोई नियुक्ति आदेश उपलब्ध नहीं दिखने की बात सामने आई है।

वर्ष 2016 में पांचवीं जेपीएससी सिविल सेवा के तहत हुई नियुक्तियों के आदेश HRMS के माध्यम से जारी किए गए थे। लेकिन छठी से तेरहवीं जेपीएससी के तहत हुई नियुक्तियों के आदेश पोर्टल पर उपलब्ध नहीं बताए जा रहे हैं।

इसी तरह स्थानांतरण श्रेणी में वर्ष 2017 का केवल एक आदेश, मातृत्व अवकाश से संबंधित एक आदेश और सेवा संपुष्टि के सीमित आदेश ही दिखाई देते हैं। वेतनवृद्धि, प्रोन्नति और एमएसीपी जैसे महत्वपूर्ण सेवा मामलों में भी पोर्टल पर आदेश उपलब्ध नहीं होने की बात कही जा रही है।

ऐसे में HRMS पोर्टल के इस्तेमाल और उसकी उपयोगिता को लेकर व्यापक सवाल खड़े हो रहे हैं। एक ओर कर्मचारियों से ऑनलाइन प्रक्रिया का सख्ती से पालन करने की अपेक्षा की जा रही है, वहीं दूसरी ओर विभागीय स्तर पर पोर्टल की सभी सुविधाओं का प्रभावी उपयोग नहीं होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। अब देखना होगा कि मुख्य सचिव और कार्मिक विभाग इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

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