तदाशा मिश्रा की DGP नियुक्ति पर SC में फिर सुनवाई

Tadasha Mishra DGP: तदाशा मिश्रा की DGP नियुक्ति पर SC में फिर सुनवाई, केंद्र ने मांगी अवमानना कार्रवाई

रांची: झारखंड की वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा की पुलिस महानिदेशक (DGP) के पद पर नियुक्ति का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। केंद्र सरकार ने झारखंड सरकार और अन्य के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग करते हुए याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की याचिका को 8 अक्टूबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति दी है।

CJI की पीठ के सामने उठाया गया मामला

केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 7 अक्टूबर को भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख किया। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं।

तुषार मेहता ने अनुरोध किया कि केंद्र की अवमानना याचिका को तदाशा मिश्रा की नियुक्ति से जुड़ी पहले से लंबित याचिकाओं के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। CJI ने इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया।

रिटायरमेंट से एक दिन पहले हुई थी नियुक्ति

तदाशा मिश्रा को झारखंड सरकार ने 30 दिसंबर 2025 को DGP नियुक्त किया था। उनकी निर्धारित सेवानिवृत्ति 31 दिसंबर 2025 को थी। यानी उनकी नियुक्ति सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले हुई थी। इसी अवधि को लेकर सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति पर सवाल उठाए गए हैं।

मामले में केंद्र का कहना है कि DGP की नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह फैसले में तय दिशा-निर्देशों का पालन किया जाना जरूरी है। केंद्र ने इसी आधार पर झारखंड सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया है।

छह महीने की सेवा बाकी होने का क्या है नियम?

इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता और न्यायमित्र (amicus curiae) राजू रामचंद्रन ने पहले सुप्रीम कोर्ट के समक्ष तदाशा मिश्रा की नियुक्ति के समय बची सेवा अवधि का मुद्दा उठाया था।

सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह मामले से जुड़े निर्देशों के अनुसार DGP पद के लिए विचार किए जाने वाले अधिकारी की नियुक्ति के समय कम से कम छह महीने की सेवा शेष होनी चाहिए। इसी आधार पर तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर सवाल उठाए गए हैं।

सितंबर में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष इस नियुक्ति को लेकर छह महीने की शेष सेवा संबंधी निर्देशों के उल्लंघन का मुद्दा भी उठ चुका है।

प्रकाश सिंह फैसले से जुड़ा है विवाद

DGP की नियुक्ति को लेकर विवाद का संबंध सुप्रीम कोर्ट के 2006 के प्रकाश सिंह फैसले से है। इस व्यवस्था के तहत राज्य सरकार को UPSC द्वारा पैनल में शामिल तीन सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से DGP का चयन करना होता है। पैनल तैयार करते समय अधिकारियों की सेवा अवधि, सेवा रिकॉर्ड और पुलिस बल का नेतृत्व करने के अनुभव जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों में यह भी कहा गया है कि DGP के रूप में चयनित अधिकारी का न्यूनतम कार्यकाल दो वर्ष होना चाहिए, भले ही उसकी सेवानिवृत्ति की तारीख कुछ भी हो। इसी प्रावधान के साथ छह महीने की शेष सेवा के मुद्दे को तदाशा मिश्रा की नियुक्ति से जुड़े मामले में उठाया गया है।

अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर

केंद्र की अवमानना याचिका के साथ तदाशा मिश्रा की DGP नियुक्ति से संबंधित अन्य लंबित याचिकाओं पर भी 8 अक्टूबर को सुनवाई प्रस्तावित है। केंद्र की याचिका में नियुक्ति को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के अनुरूप नहीं होने का दावा किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका की सुनवाई सूचीबद्ध होने का अर्थ अपने आप में अवमानना साबित होना नहीं है। अब अदालत के समक्ष यह मुद्दा रहेगा कि तदाशा मिश्रा की नियुक्ति और उससे जुड़े राज्य के नियम सुप्रीम कोर्ट द्वारा DGP नियुक्ति को लेकर तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप हैं या नहीं।

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