गोबर के दीपक बनाकर महिलाएं कमा रहीं 9 हजार रुपये महीना, एकल अभियान की अनूठी पहल

गोबर के दीपक बनाकर महिलाएं कमा रहीं 9 हजार रुपये महीना, एकल अभियान की अनूठी पहल

रांची: ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और महिला स्वावलंबन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एकल अभियान कई स्तरों पर काम कर रहा है। संगठन की पहुंच आज देश के एक लाख से अधिक गांवों तक हो चुकी है। गांवों के विकास के साथ-साथ जैविक खेती, देसी गायों के संरक्षण और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी पहल की जा रही है। इसी कड़ी में एकल गौ ग्राम योजना के तहत देसी गाय के गोबर से दीपक, धूपबत्ती और विभिन्न प्रकार की मूर्तियां तैयार कराई जा रही हैं।

इस पहल से झारखंड, बिहार सहित कई राज्यों की महिलाएं जुड़ी हैं। वे घर पर ही दीपक और अन्य उत्पाद बनाकर हर महीने सात से नौ हजार रुपये तक की आमदनी कर रही हैं। इससे महिलाओं को अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का अवसर मिल रहा है। साथ ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों के उपयोग और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का प्रयास भी हो रहा है।

एक लाख से अधिक गांवों तक पहुंचा एकल अभियान

एकल अभियान देश के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा और सामाजिक विकास के लिए काम कर रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समवैचारिक संगठनों में शामिल इस अभियान के तहत गांवों में शिक्षा की स्थिति बेहतर बनाने के साथ पर्यावरण संरक्षण और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जा रहा है। ग्रामीण जीवन और पारंपरिक संसाधनों के संरक्षण के लिए भी अलग-अलग गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

जैविक खेती को प्रोत्साहित करना और देसी गायों के महत्व को बढ़ावा देना भी इसी प्रयास का हिस्सा है। एकल गौ ग्राम योजना के माध्यम से गोबर को उपयोगी उत्पादों में बदलकर ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार का अवसर तैयार किया जा रहा है।

गोबर से बन रहे दीपक, धूपबत्ती और मूर्तियां

योजना के तहत देसी गाय के गोबर से दीपक, धूपबत्ती और कई तरह की मूर्तियां बनाई जा रही हैं। इस काम से झारखंड के देवघर, गिरिडीह, धनबाद, हजारीबाग और चक्रधरपुर की महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा बिहार के औरंगाबाद और सीतामढ़ी, उत्तर प्रदेश के मथुरा तथा उत्तराखंड के हल्द्वानी और रुद्रपुर सहित कई स्थानों पर भी महिलाएं इन उत्पादों के निर्माण में योगदान दे रही हैं।

महिलाएं घर पर रहकर इन उत्पादों को तैयार करती हैं। इससे उन्हें रोजगार के लिए दूसरे शहरों में जाने की जरूरत नहीं पड़ती और वे घरेलू जिम्मेदारियों के साथ आमदनी भी कर पा रही हैं।

हर महीने सात से नौ हजार रुपये तक की आमदनी

एकल अभियान से जुड़े इस कार्य के माध्यम से महिलाओं को प्रति माह करीब सात से नौ हजार रुपये तक की आमदनी हो रही है। तैयार उत्पादों की मांग विभिन्न शहरों में भी पहुंच रही है। झारखंड और अन्य राज्यों में बने गोबर के दीपक दिल्ली, मुंबई, रायपुर, राउरकेला और कोलकाता जैसे शहरों में भेजे जा रहे हैं।

इससे ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचाने का रास्ता खुल रहा है। अभियान का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना भी है।

250 रुपये में 22 दीपक और धूपबत्ती का पैकेट

एकल अभियान के राष्ट्रीय प्रमुख डॉ. ललन कुमार शर्मा ने बताया कि देसी गाय के गोबर से तैयार दीपकों की मांग को देखते हुए इस बार विशेष पैकेट भी तैयार कराया गया है। इसमें 22 दीपक, 250 ग्राम हल्दी और 30 धूपबत्तियां रखी गई हैं। इस पैकेट की कीमत 250 रुपये तय की गई है।

उन्होंने बताया कि दीपावली में इन उत्पादों का इस्तेमाल घर में करने के साथ इन्हें उपहार के रूप में भी दिया जा सकता है। स्थानीय उत्पाद खरीदने से इस काम में जुड़ी महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी समर्थन मिलेगा।

रांची के आरोग्य भवन में भी उपलब्ध है पैकेट

डॉ. शर्मा के अनुसार, यह पैकेट रांची के आरोग्य भवन परिसर में उपलब्ध है। एकल अभियान के विभिन्न चैप्टरों में भी इसकी मांग की जा रही है। इस योजना से जुड़े व्यवसायी भी उपहार के उद्देश्य से पैकेट मंगवा रहे हैं। उनके मुताबिक, अब तक 10 हजार परिवारों तक यह पैकेट पहुंच चुका है।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित करने के आह्वान का उल्लेख करते हुए लोगों से स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने की अपील की। अभियान के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के हुनर को बाजार से जोड़ने और पारंपरिक संसाधनों के बेहतर उपयोग की कोशिश की जा रही है।

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