रांची विश्वविद्यालय में पीजी के दो बैच का नामांकन, 2000 से घटकर 650 तक पहुंची विद्यार्थियों की संख्या
- By rakesh --
- 02 Nov 2026 --
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रांची: रांची विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर (पीजी) के शैक्षणिक सत्रों की स्थिति सवालों के घेरे में है। पीजी के 2025-27 सत्र में नामांकन के बाद अभी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी भी नहीं हुई थी कि विश्वविद्यालय ने अगले सत्र 2026-28 के लिए भी नामांकन शुरू कर दिया। खास बात यह है कि नए सत्र में फिलहाल केवल तीन पाठ्यक्रमों के लिए दाखिले की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस तरह एक ही वर्ष में पीजी के दो अलग-अलग बैच का नामांकन लिया गया है। दोनों सत्रों के नामांकन के बीच एक महीने का भी अंतर नहीं है।
विश्वविद्यालय में इससे पहले एक ही वर्ष में इस तरह दो पीजी सत्रों के नामांकन की स्थिति सामने नहीं आई थी। इस व्यवस्था को लेकर विद्यार्थियों के बीच असमंजस की स्थिति है। एक ओर पुराने सत्र के विद्यार्थियों की पढ़ाई और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, वहीं दूसरी ओर नए सत्र के लिए दाखिले शुरू कर दिए गए हैं।
पीजी के दो सत्रों के नामांकन में एक महीने का अंतर
रांची विश्वविद्यालय के पीजी सत्र 2025-27 में नामांकन के लिए आवेदन की प्रक्रिया आठ अगस्त 2026 तक चली थी। इसके बाद सितंबर तक दाखिले की प्रक्रिया पूरी की गई। इस सत्र में 650 से अधिक विद्यार्थियों ने विभिन्न विषयों में नामांकन लिया।
इसके बाद विश्वविद्यालय ने तीन नए पाठ्यक्रम शुरू किए। इनमें एमए इन एजुकेशन, एमएससी इन डेटा साइंस और एमएससी इन स्टैटिस्टिक्स शामिल हैं। इन पाठ्यक्रमों में सत्र 2026-28 के तहत नामांकन लिया जा रहा है। एमए इन एजुकेशन की कक्षाएं भी शुरू हो चुकी हैं। हालांकि, डेटा साइंस और स्टैटिस्टिक्स में अब तक एक भी आवेदन नहीं आने की जानकारी है।
इस तरह 2025-27 सत्र में नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के कुछ ही समय बाद 2026-28 सत्र के लिए भी दाखिले शुरू हो गए। विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कैलेंडर में इस तरह की स्थिति पहले देखने को नहीं मिली थी।
एक साल पीछे चल रहा पीजी का वर्तमान सत्र
पीजी का वर्तमान सत्र 2025-27 पहले से ही करीब एक साल पीछे चल रहा है। विद्यार्थियों ने वर्ष 2026 में इस सत्र के लिए नामांकन लिया है। ऐसे में शैक्षणिक सत्र के नाम और वास्तविक पढ़ाई शुरू होने के समय के बीच अंतर सामने आया है।
इस देरी का असर विद्यार्थियों की आगे की पढ़ाई पर पड़ सकता है। निर्धारित दो वर्षीय पीजी पाठ्यक्रम के लिए विद्यार्थियों के पास समय कम बचने की चिंता भी जताई जा रही है। यदि कक्षाएं, परीक्षाएं और परिणाम समय पर नहीं हुए, तो इसका असर आगे की शैक्षणिक योजनाओं पर पड़ सकता है।
पीएचडी, यूजीसी नेट और शिक्षक भर्ती पर पड़ सकता है असर
पीजी सत्र में देरी का असर केवल विश्वविद्यालय की पढ़ाई तक सीमित नहीं रह सकता। इससे पीएचडी में दाखिले की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को परेशानी हो सकती है। यूजीसी नेट की परीक्षा में शामिल होने की योजना बना रहे अभ्यर्थियों के सामने भी समय और परिणाम से जुड़ी चुनौतियां आ सकती हैं।
इसके अलावा पीजी का परिणाम देर से जारी होने पर पीजीटी शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन करने में भी विद्यार्थियों को दिक्कत हो सकती है। भर्ती की निर्धारित पात्रता और आवेदन की समय-सीमा के बीच पीजी का परिणाम महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में सत्र और परीक्षा में देरी विद्यार्थियों के करियर की योजनाओं को प्रभावित कर सकती है।
2000 से घटकर 650 तक पहुंची विद्यार्थियों की संख्या
रांची विश्वविद्यालय के पीजी में विद्यार्थियों की संख्या में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2024-26 सत्र में विद्यार्थियों की संख्या 2000 से अधिक थी। वहीं, वर्तमान 2025-27 सत्र में नामांकन लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या घटकर करीब 650 तक रह गई है।
नामांकन संख्या में आई इस गिरावट के साथ सत्र में देरी भी चिंता का विषय बनी हुई है। विद्यार्थियों के लिए समय पर कक्षाएं शुरू होना, परीक्षाएं आयोजित करना और परिणाम जारी करना जरूरी है, ताकि उनकी आगे की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी प्रभावित न हो।
समय पर सत्र पूरा कराने की तैयारी में विश्वविद्यालय प्रशासन
दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन का प्रयास है कि पीजी के शैक्षणिक सत्र को नियमित किया जाए और पढ़ाई निर्धारित समय पर पूरी हो। इसके लिए तैयारियां भी की जा रही हैं। कुलपति डॉ. सरोज शर्मा के निर्देश पर विश्वविद्यालय के सभी पदाधिकारी सत्र को समय पर संचालित करने के लिए प्रयासरत हैं।
अब विद्यार्थियों की नजर इस बात पर है कि विश्वविद्यालय प्रशासन पुराने सत्र की पढ़ाई, परीक्षा और परिणाम की प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी करता है। साथ ही नए पाठ्यक्रमों में शुरू हुए नामांकन और कक्षाओं का संचालन भी निर्धारित शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार हो पाता है या नहीं।
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