झारखंड के अस्पतालों में लगाना होगा रेट चार्ट, मरीजों को पहले ही पता चलेगा इलाज का खर्च

झारखंड के अस्पतालों में लगाना होगा रेट चार्ट, मरीजों को पहले ही पता चलेगा इलाज का खर्च

रांची: झारखंड में अस्पतालों और निजी चिकित्सा संस्थानों में इलाज तथा जांच के शुल्क को लेकर पारदर्शिता बढ़ाने की पहल की गई है। अब मरीजों को इलाज कराने से पहले संबंधित सेवाओं की दरों की जानकारी मिल सकेगी। इसके लिए अस्पतालों और क्लीनिकों में रेट चार्ट प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करने पर जोर दिया जा रहा है। रांची में सिविल सर्जन कार्यालय ने इस संबंध में 29 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी कर सभी संबंधित नर्सिंग होम, अस्पतालों और क्लीनिकों को सात दिनों के भीतर जरूरी जानकारियां सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है।

लंबे समय से निजी अस्पतालों में इलाज और जांच के नाम पर अधिक शुल्क वसूलने की शिकायतें सामने आती रही हैं। कई बार मरीजों और उनके परिजनों को जांच या उपचार शुरू होने से पहले खर्च की स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती। ऐसे में रेट चार्ट प्रदर्शित होने से मरीजों को चिकित्सा सेवाओं की लागत समझने और अपने बजट के अनुसार निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।

अस्पतालों में सार्वजनिक करनी होंगी इलाज और जांच की दरें

सिविल सर्जन कार्यालय के आदेश के अनुसार, संबंधित चिकित्सा संस्थानों को अद्यतन और मदवार रेट चार्ट प्रदर्शित करना होगा। इसमें डॉक्टरों की परामर्श फीस, विभिन्न जांचों का शुल्क, चिकित्सा प्रक्रियाओं की लागत, बेड चार्ज और अन्य लागू सेवा शुल्क का स्पष्ट विवरण देना होगा।

रेट चार्ट ऐसी जगह लगाया जाना चाहिए, जहां मरीज और उनके परिजन आसानी से उसे देख सकें। अस्पताल के रिसेप्शन या किसी प्रमुख स्थान पर इसकी व्यवस्था की जा सकती है। इससे मरीजों को इलाज शुरू कराने से पहले संभावित खर्च का अंदाजा मिल सकेगा।

रांची के निजी अस्पतालों में वसूली को लेकर उठते रहे हैं सवाल

राजधानी रांची में भी निजी अस्पतालों में इलाज और जांच के शुल्क को लेकर समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। मरीजों और उनके परिजनों की ओर से कई बार आरोप लगाए गए हैं कि उन्हें जांच की वास्तविक कीमत या इलाज में आने वाले खर्च की जानकारी पहले से नहीं दी जाती।

कुछ मामलों में खून की जांच के नाम पर 30 हजार रुपये तक वसूले जाने के आरोप भी चर्चा में रहे हैं। हालांकि, ऐसे आरोपों को संबंधित मामले की पुष्टि और जांच के आधार पर ही देखा जाना चाहिए। रेट चार्ट सार्वजनिक होने से अस्पतालों की ओर से लिए जाने वाले शुल्क की जानकारी पहले से उपलब्ध रहेगी और मरीज बिल का मिलान भी कर सकेंगे।

निबंधन प्रमाणपत्र और डॉक्टरों की योग्यता भी बतानी होगी

सिविल सर्जन कार्यालय के निर्देश केवल फीस की सूची लगाने तक सीमित नहीं हैं। संबंधित अस्पतालों और क्लीनिकों को अपना वैध एवं अद्यतन निबंधन प्रमाणपत्र या लाइसेंस भी प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करना होगा।

इसके साथ ही संस्थानों में उपलब्ध डॉक्टरों के नाम, शैक्षणिक योग्यता, मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण का विवरण, विशेषज्ञता और परामर्श या ड्यूटी का समय भी सार्वजनिक करना होगा। अस्पतालों को उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं, मरीजों के अधिकारों और शिकायत निवारण व्यवस्था की जानकारी भी प्रदर्शित करनी होगी।

इससे मरीजों को यह समझने में मदद मिलेगी कि संबंधित अस्पताल में कौन-कौन सी चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हैं और वहां कार्यरत डॉक्टरों की योग्यता तथा विशेषज्ञता क्या है।

केवल रेट चार्ट लगाना काफी नहीं, निगरानी भी जरूरी

रेट चार्ट लगाने का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब अस्पतालों की ओर से प्रदर्शित दरों का पालन भी सुनिश्चित किया जाए। केवल शुल्क की सूची दीवार पर लगा देने से मरीजों को राहत नहीं मिलेगी, यदि बिल में बिना स्पष्ट जानकारी के अतिरिक्त शुल्क जोड़े जाते हैं या प्रदर्शित दरों से अलग वसूली की जाती है।

इसके लिए प्रशासन को नियमित निरीक्षण और शिकायतों पर कार्रवाई की व्यवस्था प्रभावी बनानी होगी। रांची के सिविल सर्जन कार्यालय ने संबंधित निरीक्षण अधिकारियों को निर्देशों के अनुपालन की जांच करने को कहा है। किसी संस्थान में कमी या नियमों का उल्लंघन मिलने पर इसकी जानकारी सक्षम प्राधिकार को दी जाएगी, ताकि लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा सके।

स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता मरीजों का महत्वपूर्ण हित है। इलाज और जांच की दरें सार्वजनिक होने से मरीजों को खर्च की जानकारी पहले मिल सकेगी और अस्पतालों की जवाबदेही भी बढ़ सकती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन रेट चार्ट के प्रदर्शन के साथ-साथ अस्पतालों की बिलिंग व्यवस्था की निगरानी किस तरह सुनिश्चित करता है।

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