7.16 एकड़ जमीन के दस्तावेजों पर सवाल, ED कर रही लेन-देन की जांच

7.16 एकड़ जमीन के दस्तावेजों पर सवाल, ED कर रही लेन-देन की जांच

जमशेदपुर: रांची के चर्चित हेहल जमीन घोटाले की जांच में जमशेदपुर के कारोबारी रवि भाटिया और श्याम सिंह की भूमिका को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच जारी है। जांच एजेंसी की ओर से समन जारी किए जाने के बावजूद दोनों कारोबारी पूछताछ के लिए रांची स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में उपस्थित नहीं हुए। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, रवि भाटिया को 26 अक्टूबर और श्याम सिंह को 27 अक्टूबर 2026 को बुलाया गया था। दोनों के पेश नहीं होने के बाद अब जांच एजेंसी के अगले कदम पर नजर है।

यह मामला रांची के हेहल मौजा की 7.16 एकड़ जमीन से जुड़ा है। जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी, म्यूटेशन की प्रक्रिया और रजिस्ट्री के दौरान हुए लेन-देन को लेकर जांच की जा रही है। जांच एजेंसी के अनुसार, जमीन का अनुमानित सर्किल रेट करीब 30 करोड़ रुपये था, जबकि दस्तावेजों में सौदे की कीमत 15.10 करोड़ रुपये दिखाई गई थी।

पहले भी कारोबारियों के ठिकानों पर हो चुकी है छापेमारी

हेहल जमीन मामले की जांच के सिलसिले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और ED की टीमें इससे पहले भी रवि भाटिया और श्याम सिंह से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी हैं। जांच के दौरान जमशेदपुर के जुगसलाई, बिष्टुपुर और आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित आवासों तथा प्रतिष्ठानों की तलाशी लिए जाने की जानकारी सामने आई थी।

इस कार्रवाई के दौरान कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए जाने की बात कही गई थी। जांच एजेंसियां जमीन के स्वामित्व, उससे संबंधित सरकारी रिकॉर्ड और कथित वित्तीय लेन-देन की कड़ियों की पड़ताल कर रही हैं।

दोनों कारोबारियों को पूछताछ के लिए निर्धारित तारीखों पर बुलाया गया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। ऐसे में जांच एजेंसी आगे क्या कदम उठाती है, यह महत्वपूर्ण होगा। दोबारा तलाशी या अन्य कार्रवाई की संभावना को लेकर चर्चा है, हालांकि ED की ओर से अगली कार्रवाई के संबंध में किसी आधिकारिक निर्णय की पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

7.16 एकड़ जमीन के दस्तावेजों में हेराफेरी का आरोप

जांच का केंद्र हेहल मौजा की 7.16 एकड़ जमीन है। ED की जांच के अनुसार, जमीन पर कब्जे का रास्ता तैयार करने के लिए सरकारी रिकॉर्ड रूम से मूल दस्तावेज गायब किए गए और वर्ष 1938 के कथित फर्जी कागजात तैयार किए गए थे। मामले में जमीन के म्यूटेशन की प्रक्रिया को लेकर भी अनियमितताओं के आरोप हैं।

जांच में यह बात सामने आने का दावा किया गया है कि तत्कालीन अंचल अधिकारी (CO) और भूमि सुधार उपसमाहर्ता (LRDC) ने म्यूटेशन आवेदन को खारिज कर दिया था। इसके बावजूद तत्कालीन उपायुक्त छवि रंजन की अदालत से विनोद सिंह के पक्ष में म्यूटेशन का आदेश पारित हुआ था।

जमीन के पुराने रिकॉर्ड, म्यूटेशन आदेश और उसके बाद हुए स्वामित्व हस्तांतरण की प्रक्रिया जांच के अहम पहलू हैं। हालांकि, दस्तावेजों में हेराफेरी और जमीन पर अवैध कब्जे से जुड़े आरोपों को अंतिम रूप से साबित हुआ तथ्य नहीं माना जा सकता। मामले में जांच के निष्कर्ष और न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होंगे।

15.10 करोड़ रुपये में दिखाई गई जमीन की रजिस्ट्री

ED की जांच के मुताबिक, म्यूटेशन के बाद जमीन की रजिस्ट्री चार सेल डीड के माध्यम से रवि भाटिया और श्याम सिंह के नाम कराई गई थी। जांच एजेंसी ने जमीन का सर्किल रेट के आधार पर अनुमानित मूल्य करीब 30 करोड़ रुपये बताया है, जबकि रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेजों में सौदे की कीमत 15.10 करोड़ रुपये दर्ज होने की बात कही गई है।

जांच एजेंसी के अनुसार, कथित रैयत के बैंक खाते में केवल 3.66 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए थे। आरोप है कि यह रकम कुछ ही समय बाद खरीदारों से जुड़ी कंपनियों के खातों में वापस चली गई। ED इस कथित लेन-देन और रकम के प्रवाह की जांच मनी लॉन्ड्रिंग के संदेह के आधार पर कर रही है।

इस मामले में जमीन की वास्तविक कीमत, रजिस्ट्री में दिखाई गई राशि और बैंक खातों के माध्यम से हुए लेन-देन के बीच के अंतर की जांच अहम मानी जा रही है। जांच एजेंसी वित्तीय दस्तावेजों और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर मामले की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है।

समन के बाद अब ED की अगली कार्रवाई पर नजर

रवि भाटिया और श्याम सिंह के निर्धारित तारीखों पर पूछताछ में शामिल नहीं होने के बाद हेहल जमीन मामले में ED की अगली कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, केवल समन पर उपस्थित नहीं होने के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ आरोप साबित नहीं होते। आगे की कार्रवाई जांच एजेंसी के निर्णय, उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानूनी प्रक्रिया के तहत होगी।

फिलहाल, 7.16 एकड़ जमीन के कथित फर्जी दस्तावेज, म्यूटेशन आदेश, रजिस्ट्री और बैंक खातों के लेन-देन की जांच इस मामले के प्रमुख पहलू हैं। ED की ओर से आगे कोई आधिकारिक जानकारी जारी होने पर जांच की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

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