631 अनुपस्थित डॉक्टरों पर कार्रवाई करेगा स्वास्थ्य विभाग, इरफान अंसारी ने बताई सरकार की योजना
- By rakesh --
- 27 Oct 2026 --
- comments are disable
रांची: झारखंड में लंबे समय से अनुपस्थित रहने और नियुक्ति के बाद कार्यस्थल पर योगदान नहीं देने वाले 631 डॉक्टरों पर स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। विभाग ने इन डॉक्टरों को चिह्नित कर नियमानुसार सेवामुक्त करने की प्रक्रिया शुरू की है। ये डॉक्टर अलग-अलग वर्षों में नियुक्त किए गए थे। सरकार का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि मरीजों को समय पर इलाज मिल सके।
वर्ष 2009 में नियुक्त सबसे अधिक 308 डॉक्टर चिह्नित
स्वास्थ्य विभाग की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, विभिन्न वर्षों में नियुक्त ऐसे डॉक्टरों के मामले सामने आए हैं, जिन्होंने कार्यस्थल पर योगदान नहीं दिया या लंबे समय से अनुपस्थित हैं। इनमें वर्ष 2009 में नियुक्त 308 डॉक्टर शामिल हैं, जो सबसे बड़ी संख्या है।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 में नियुक्त 124, वर्ष 2012 में 65, वर्ष 2013 में 38, वर्ष 2020 में 37 और वर्ष 2021 में 17 डॉक्टर चिह्नित किए गए हैं। इसके अलावा वर्ष 1990 और 2023 में नियुक्त 16-16, वर्ष 2000 में सात, वर्ष 1997 में दो तथा वर्ष 1988 में नियुक्त एक डॉक्टर का मामला भी सूची में शामिल है।
वर्ष 2025 में 143 डॉक्टरों की सेवा हो चुकी है समाप्त
स्वास्थ्य विभाग इससे पहले भी योगदान नहीं देने वाले डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। वर्ष 2025 में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के माध्यम से नियुक्त 86 मेडिकल ऑफिसर और 57 विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त की गई थीं। इन डॉक्टरों ने नियुक्ति के बाद कार्यभार ग्रहण नहीं किया था।
अब विभाग ने 631 अन्य डॉक्टरों के मामलों की समीक्षा करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। इस कदम का उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में उपलब्ध पदों और वास्तविक चिकित्सकीय जरूरतों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना है।
रिक्त पदों पर नए डॉक्टरों की नियुक्ति की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग की योजना सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ाने की है। चिह्नित डॉक्टरों के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई पूरी होने और पद रिक्त होने की स्थिति में नए चिकित्सकों की नियुक्ति की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
सरकार को उम्मीद है कि इससे स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों की कमी दूर करने और मरीजों को नियमित चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। खासकर उन सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को लाभ मिल सकता है, जहां चिकित्सकों की उपलब्धता मरीजों के इलाज को प्रभावित करती है।
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने क्या कहा?
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में डॉक्टरों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। सरकार का लक्ष्य राज्य के प्रत्येक सरकारी अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि नियुक्ति के बाद कार्यस्थल पर योगदान नहीं देना या बिना उचित कारण अनुपस्थित रहना गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। जहां पद रिक्त होंगे, वहां नए डॉक्टरों की नियुक्ति की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे, ताकि मरीजों को इलाज के लिए परेशान न होना पड़े।
यह भी पढ़ें: धनबाद में नकली विदेशी शराब बनाने का खुलासा, झरिया में छापेमारी से मचा हड़कंप