पूर्व अध्यक्ष से जुड़ी कथित सूची में 15 नाम, 10 के चयन की रिपोर्ट
- By rakesh --
- 25 Oct 2026 --
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रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच के दौरान आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांगते के लैपटॉप बैग से 15 अभ्यर्थियों के विवरण वाली एक कथित सूची मिलने की बात सामने आई है। बताया गया है कि इस सूची में अभ्यर्थियों के नाम, रोल नंबर, रजिस्ट्रेशन नंबर, साक्षात्कार की तारीख और आवंटित किए जाने वाले संभावित पदों से संबंधित हस्तलिखित जानकारी दर्ज थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, सूची में दर्ज 15 अभ्यर्थियों में से 10 का 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में अंतिम चयन हुआ था। इस जानकारी के सामने आने के बाद भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और चयन के मानकों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, सूची में नाम दर्ज होना या परीक्षा में चयनित होना किसी व्यक्ति के गलत तरीके से चयनित होने का अपने-आप में प्रमाण नहीं है। पूरे मामले में दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।
कथित सूची में 15 अभ्यर्थियों के विवरण होने की बात
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पूर्व अध्यक्ष के लैपटॉप बैग से मिली बताई जा रही सूची में 15 अभ्यर्थियों की जानकारी दर्ज थी। इसमें व्यक्तिगत विवरणों के साथ साक्षात्कार की तारीख और डीएसपी, झारखंड प्रशासनिक सेवा (JAS) तथा झारखंड वित्त सेवा (JFS) जैसे पदों से संबंधित हस्तलिखित उल्लेख होने का दावा किया गया है।
जांच के लिहाज से यह पता लगाना अहम होगा कि सूची कब और किस उद्देश्य से तैयार की गई थी। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट करना जरूरी है कि इसमें दर्ज पदों और साक्षात्कार संबंधी विवरणों का अंतिम चयन परिणाम से क्या संबंध था। दस्तावेज की प्रामाणिकता और उसके संदर्भ की पुष्टि के बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
10 चयनित अभ्यर्थियों के नाम आने का दावा
रिपोर्ट में कथित सूची से जुड़े जिन 10 अभ्यर्थियों के अंतिम चयन की बात कही गई है, उनमें कश्मीरा हेम्ब्रम, रवि कुमार, महिमा सिंह, विवेक कुमार, जयदीप चौधरी, जनक राज, शालिनी राठी, सेजल सहरावत, विक्की और सरिता बारला के नाम शामिल बताए गए हैं।
इन नामों का उल्लेख होने से जांच में दस्तावेजों और परीक्षा परिणामों के बीच संबंध की पड़ताल महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि, किसी सूची में नाम होना अपने-आप में अनियमितता में शामिल होने का प्रमाण नहीं है। संबंधित अभ्यर्थियों की भूमिका के बारे में कोई निष्कर्ष निकालने के लिए स्वतंत्र और पुष्ट साक्ष्य आवश्यक हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के CCTV फुटेज की पड़ताल
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि जांचकर्ताओं ने कुछ अभ्यर्थियों के प्रारंभिक परीक्षा केंद्रों के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की। इनमें रवि कुमार, कश्मीरा हेम्ब्रम, सेजल सहरावत, शालिनी राठी और विवेक कुमार के नाम बताए गए हैं।
फुटेज की जांच से संबंधित परिस्थितियों और गतिविधियों को समझने में मदद मिल सकती है। लेकिन किसी दृश्य या गतिविधि के आधार पर अनुचित साधनों के इस्तेमाल का निष्कर्ष निकालने के लिए पूरा संदर्भ, परीक्षा केंद्र के रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों का मिलान जरूरी है। जांच में इन तथ्यों की पुष्टि किस तरह होती है, यह मामले के निष्कर्ष के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
साक्षात्कार बोर्ड की भूमिका पर भी उठे सवाल
रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया है कि कथित सूची में शामिल अभ्यर्थियों के साक्षात्कार तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांगते के बोर्ड में अलग-अलग तारीखों पर हुए थे। इस दावे के संदर्भ में साक्षात्कार बोर्ड के गठन, अभ्यर्थियों को बोर्ड आवंटित करने की प्रक्रिया और निर्धारित नियमों के पालन की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
यदि जांच में चयन प्रक्रिया के दौरान किसी तरह के अनुचित हस्तक्षेप के प्रमाण मिलते हैं, तो इससे आयोग की भर्ती व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं। फिलहाल, कथित सूची, साक्षात्कार रिकॉर्ड और अंतिम परिणामों के बीच संबंध की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जानी चाहिए।
JPSC भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर नजर
इस मामले ने झारखंड लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, रिकॉर्ड के रखरखाव और चयन संबंधी निर्णयों की जवाबदेही पर चर्चा को फिर सामने ला दिया है। प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों का भरोसा बनाए रखने के लिए चयन प्रक्रिया का नियमों के अनुरूप होना और शिकायतों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
अब मामले में कथित सूची की प्रामाणिकता, उसमें दर्ज विवरणों और परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड के मिलान पर ध्यान रहेगा। जांच पूरी होने तक आरोपों और दावों को प्रमाणित निष्कर्ष से अलग रखना आवश्यक है। अंतिम स्थिति जांच एजेंसियों की पुष्टि और सक्षम न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्षों से ही स्पष्ट होगी।
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