JPSC पेपर लीक केस में एक और गिरफ्तारी, जांच के घेरे में TDPL और वेबेल का नेटवर्क
- By rakesh --
- 31 Aug 2026 --
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रांची। JPSC नियुक्ति घोटाला और JSSC CGL से जुड़ी गड़बड़ी की जांच के दौरान सीआईडी को कई अहम जानकारियां मिली हैं। जांच में मो. उस्मान की भूमिका सामने आने की बात कही जा रही है। बताया गया है कि उत्तर प्रदेश में परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ी के एक मामले में उसका नाम सामने आया था और बाद में उसे JPSC से जुड़े काम में शामिल किया गया।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी का दायरा कितना बड़ा था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
TDPL के जरिए JPSC में काम करने का मिला मौका
जांच के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में मो. उस्मान एक दूसरी कंपनी के लिए काम करता था। वहां आयोजित परीक्षाओं में OMR शीट से कथित छेड़छाड़ करने की जानकारी TDPL के निदेशक रामवीर सिंह को मिली थी।
इसके बाद कथित तौर पर उस्मान को JPSC से जुड़े काम के लिए बुलाया गया। उसे TDPL का कर्मचारी बताया गया, जबकि वह मूल रूप से दूसरी कंपनी से जुड़ा था और TDPL ने उसे अपने काम में लगाया था।
जांच में यह भी सामने आने की बात कही गई है कि उस्मान के साथ तीन अन्य लोगों की मदद से अभ्यर्थियों की OMR शीट में कथित तौर पर बदलाव किए जाते थे। OMR की PDF में छेड़छाड़ करने और मूल डेटा बदलने के आरोपों की भी जांच की जा रही है।
यूपी में परीक्षा गड़बड़ी के मामलों की भी जांच
सीआईडी अब उत्तर प्रदेश में हुई उन परीक्षाओं से जुड़े मामलों की भी जांच कर रही है, जिनमें कथित तौर पर गड़बड़ी हुई थी। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उन घटनाओं में शामिल लोगों की भूमिका क्या थी और उनका JPSC मामले से कोई संबंध था या नहीं।
इसके अलावा यह भी जांच का हिस्सा है कि JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी केवल OMR शीट तक सीमित थी या मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं में भी किसी तरह का बदलाव किया गया था।
मामले में गिरफ्तार मो. उस्मान और एक अन्य आरोपी ने कथित तौर पर TDPL निदेशक रामवीर सिंह पर आरोप लगाए हैं। JPSC की उप-परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी ने भी जांच के दौरान TDPL निदेशक की भूमिका को लेकर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
JPSC पेपर लीक मामले में एक और गिरफ्तारी
JPSC पेपर लीक मामले में सीआईडी ने रविवार को गिरिडीह के बेंगाबाद थाना क्षेत्र से समीर कुमार नामक एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार किया है।
वहीं, दिल्ली से गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों से भी पूछताछ जारी है। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने वेबेल, उससे जुड़ी संस्था आईएनएस और कुछ अन्य कंपनियों के बारे में जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है।
वेबेल और अन्य कंपनियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर खुद को निचले स्तर पर काम करने वाला बताया है। उनके अनुसार, मुख्य स्तर पर काम और JSSC से संबंधित बातचीत वेबेल कंपनी के निदेशक मिथिलेश सिंह और दो अन्य लोग करते थे।
अब सीआईडी इस पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच कर रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी किस स्तर पर हुई, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और OMR से लेकर पेपर लीक तक का नेटवर्क किस तरह काम करता था।
फिलहाल मामले में सामने आए आरोपों और बयानों की जांच जारी है। आरोपियों की भूमिका और पूरे परीक्षा घोटाले की वास्तविक तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।