बांग्लादेश में मजदूरों का बड़ा आंदोलन, 30 हजार टका न्यूनतम मजदूरी की मांग पर 529 फैक्ट्रियां प्रभावित
- By rakesh --
- 02 Nov 2026 --
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ढाका: बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग से जुड़े मजदूर न्यूनतम मासिक मजदूरी बढ़ाकर 30 हजार टका करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आये हैं। मजदूरों का कहना है कि उन्हें फिलहाल करीब 12 हजार टका मासिक मजदूरी मिल रही है, जो मौजूदा महंगाई और बढ़ती जीवन लागत के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। भोजन, मकान का किराया, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार बढ़ते खर्च ने उनकी आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है। इसी वजह से मजदूर वेतन में बड़ी बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।
मजदूरों का प्रदर्शन 31 अक्टूबर से शुरू हुआ। इसके बाद ढाका के मिरपुर, आशुलिया, सावर और गाजीपुर जैसे प्रमुख औद्योगिक इलाकों में विरोध तेज हो गया। प्रदर्शनकारियों ने कई जगह सड़कों को जाम किया और गारमेंट फैक्ट्रियों को बंद करा दिया। हड़ताल और विरोध के कारण करीब 529 कारखाने प्रभावित हुए हैं। इस पूरे घटनाक्रम से लगभग 10 लाख श्रमिकों पर असर पड़ने की बात सामने आयी है।
12 हजार से बढ़ाकर 30 हजार टका करने की मांग
कपड़ा मजदूरों की प्रमुख मांग न्यूनतम मासिक मजदूरी को 30 हजार टका तक बढ़ाने की है। फिलहाल उन्हें करीब 12 हजार टका मिल रहे हैं। मजदूरों का कहना है कि मौजूदा वेतन में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर मकान का किराया और इलाज तक का खर्च बढ़ने से उनकी क्रय शक्ति लगातार घट रही है।
प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि बढ़ती महंगाई के अनुरूप मजदूरी में बदलाव जरूरी है। उनका कहना है कि जब भोजन, आवास, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च बढ़ रहा है, तो मौजूदा वेतन में सम्मानजनक जीवन जीना कठिन हो गया है। इसी मांग को लेकर मजदूर न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी के लिए दबाव बना रहे हैं।
ढाका से गाजीपुर तक औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदर्शन
31 अक्टूबर को शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन जल्द ही बांग्लादेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों तक फैल गया। राजधानी ढाका के मिरपुर के अलावा आशुलिया, सावर और गाजीपुर में भी मजदूरों ने प्रदर्शन किया। कई स्थानों पर सड़कों पर जाम लगाया गया, जिससे आवागमन प्रभावित हुआ।
प्रदर्शन के दौरान गारमेंट फैक्ट्रियों का कामकाज भी बाधित हुआ। कुछ कारखानों को बंद कर दिया गया, जबकि कई इकाइयों में उत्पादन प्रभावित होने की जानकारी है। कपड़ा उद्योग बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए इन इलाकों में जारी विरोध का असर बड़ी संख्या में श्रमिकों और औद्योगिक गतिविधियों पर पड़ा है।
529 कारखानों का काम प्रभावित, 10 लाख श्रमिकों पर असर
मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर जारी प्रदर्शन और हड़ताल से करीब 529 कारखाने प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा लगभग 10 लाख श्रमिकों पर इस घटनाक्रम का असर पड़ने की बात कही गयी है। फैक्ट्रियों के बंद रहने और उत्पादन बाधित होने से उद्योग के सामने भी चुनौती खड़ी हुई है।
औद्योगिक क्षेत्रों में सड़कों को जाम किये जाने से सामान्य आवाजाही पर भी असर पड़ा। मजदूरों की मांग और फैक्ट्री संचालन के बीच टकराव के कारण स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में प्रभावित कारखानों की अलग-अलग स्थिति या उत्पादन दोबारा शुरू होने की समय-सीमा का विवरण नहीं दिया गया है।
सरकार ने प्रदर्शन के लिए अवामी लीग को ठहराया जिम्मेदार
इस बीच बांग्लादेश सरकार ने मजदूरों के प्रदर्शन के लिए अवामी लीग को जिम्मेदार ठहराया है। सरकार का यह आरोप राजनीतिक विवाद को भी इस घटनाक्रम से जोड़ता है। दूसरी ओर, मजदूर अपनी मांग को महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत से जोड़ रहे हैं।
फिलहाल इस पूरे मामले में मजदूरों की मुख्य मांग न्यूनतम मासिक मजदूरी 30 हजार टका करने की है। प्रदर्शन के कारण औद्योगिक गतिविधियों पर पड़े असर और बड़ी संख्या में श्रमिकों के प्रभावित होने से स्थिति पर सबकी नजर बनी हुई है।
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