Flydubai Captain Smit: ‘मैं सभी को मरने नहीं दे सकता था’, घायल कैप्टन ने PM मोदी को सुनाई आपबीती
- By rakesh --
- 02 Oct 2026 --
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नई दिल्ली: फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में हुई घटना के दौरान गंभीर रूप से घायल भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार ने मुश्किल हालात में भी हिम्मत नहीं छोड़ी। विमान के कॉकपिट में हमले के बाद वह घायल होकर फर्श पर गिर गए थे। इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि विमान तेजी से नीचे जा रहा है। इसके बावजूद उन्होंने अपनी बची हुई ताकत जुटाई और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में कामयाब रहे, ताकि दूसरे लोग अंदर पहुंचकर स्थिति संभालने में मदद कर सकें।
2 अक्टूबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉल के जरिए कैप्टन स्मित से बातचीत की। इस दौरान पायलट ने घटना के भयावह पलों को याद किया और बताया कि उस समय उनके मन में यात्रियों की जान बचाने का विचार था। प्रधानमंत्री ने उनके साहस और सूझबूझ की सराहना की और जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
‘बस एक आखिरी कोशिश करनी है’, घायल होने के बावजूद खोला दरवाजा
प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित ने बताया कि हमले के बाद वह फर्श पर गिर चुके थे। शरीर गंभीर चोटों से जूझ रहा था, लेकिन उन्हें विमान की स्थिति का अंदाजा हो रहा था। अपने 17 साल के उड़ान अनुभव के आधार पर उन्हें महसूस हुआ कि विमान नीचे जा रहा है।
उन्होंने बताया कि उस समय उन्होंने खुद से कहा कि उन्हें एक आखिरी कोशिश करनी होगी, क्योंकि कॉकपिट का दरवाजा सामने था। लगातार चोट लगने के बावजूद वह किसी तरह दरवाजा खोलने में सफल रहे। इसके बाद दूसरे लोग भी वहां पहुंच सके और विमान की स्थिति संभालने में मदद मिली।
कैप्टन स्मित ने बातचीत में यह भी स्पष्ट किया कि इस घटना के दौरान अन्य लोगों ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विमान में मौजूद लोगों और चालक दल की मदद से संकट से निपटने में सहायता मिली।
‘मैं अपनी जान बचा रहा था, लेकिन सभी को मरने नहीं दे सकता था’
कैप्टन स्मित ने प्रधानमंत्री को बताया कि उस वक्त वह खुद भी अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन उन्हें एहसास था कि विमान में सवार अन्य लोगों की जिंदगी भी खतरे में है।
उन्होंने कहा कि वह किसी भी हालत में सभी यात्रियों को मरने नहीं दे सकते थे। उनके इस बयान से उस समय की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है, जब वह खुद घायल थे और विमान की स्थिति भी चिंताजनक थी।
इस घटना के दौरान कॉकपिट का दरवाजा खोलना मदद पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। इसके बाद अन्य लोगों को हस्तक्षेप करने और स्थिति संभालने का अवसर मिला।
17 साल का उड़ान अनुभव आया काम, हनुमान चालीसा का भी किया पाठ
कैप्टन स्मित ने बताया कि वह पिछले 17 वर्षों से विमान उड़ा रहे हैं और 11 साल से कैप्टन हैं। लंबे अनुभव के कारण उन्हें विमान की हलचल और उसकी स्थिति को समझने में मदद मिली। संकट के उस क्षण में यही अनुभव उनके काम आया।
बातचीत में उन्होंने अपने विश्वास का भी जिक्र किया। स्मित ने बताया कि जब भी वह मुश्किल परिस्थिति में होते हैं, तो हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं। विमान में संकट के दौरान भी वह इसका पाठ कर रहे थे। उन्होंने बताया कि इस कठिन समय में इससे उन्हें मानसिक संबल मिला।
PM मोदी ने की तारीफ, जल्द स्वस्थ होने की कामना की
कैप्टन स्मित की आपबीती सुनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके साहस, धैर्य और सूझबूझ की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट के समय लिए गए उनके फैसलों ने कई लोगों की जान बचाने में मदद की।
मोदी ने कैप्टन स्मित को भरोसा दिलाया कि जरूरत पड़ने पर वह उनसे संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश उनके जल्द स्वस्थ होने की कामना कर रहा है। बातचीत के दौरान कैप्टन स्मित भावुक भी हो गए। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें प्रधानमंत्री से इस तरह बातचीत करने का अवसर मिलेगा। प्रधानमंत्री ने उन्हें सहज करते हुए बातचीत जारी रखी।
UAE के अस्पताल में चल रहा है इलाज
कैप्टन स्मित फिलहाल संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अस्पताल में भर्ती हैं और चोटों से उबर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को बताया कि स्वस्थ होने में समय लग सकता है, लेकिन उन्हें अपनी रिकवरी पर भरोसा है।
उड़ान FZ1073 में हुई घटना की जांच संबंधित अधिकारियों द्वारा की जा रही है। फिलहाल कैप्टन स्मित के लिए प्राथमिकता चोटों से उबरना है। उनकी आपबीती और संकट के दौरान उठाए गए कदमों को लेकर देश-विदेश में चर्चा हो रही है।
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