दिल्ली में पीएम मोदी की अध्यक्षता में जल शक्ति विभागीय शिखर सम्मेलन, योगेंद्र प्रसाद ने झारखंड के लिए ₹6,105 करोड़ मांगे
- By rakesh --
- 03 Sep 2026 --
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नई दिल्ली। पेयजल एवं स्वच्छता तथा उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में जल शक्ति मंत्रालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय ‘विभागीय शिखर सम्मेलन-2026’ के समापन सत्र में हिस्सा लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। इस दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल भी मौजूद रहे।
सम्मेलन में देश में जल परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।
जल परियोजनाओं को समय पर पूरा करने पर जोर
सम्मेलन में जल परियोजनाओं को निर्धारित समय पर पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया। इसके साथ ही जल संचय को जन-आंदोलन का रूप देने और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों को सुरक्षित रखने पर भी चर्चा हुई।
बैठक में प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक पर्याप्त, सुरक्षित, नियमित और भरोसेमंद जल सेवा पहुंचाने को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। जलापूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए राज्यों की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।
झारखंड के लंबित ₹6,105 करोड़ केंद्रांश की मांग
सम्मेलन के दौरान मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने झारखंड से जुड़े वित्तीय मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने केंद्र सरकार से झारखंड के लिए लंबित ₹6,105 करोड़ के केंद्रांश को जल्द जारी करने की मांग रखी।
उन्होंने राज्य में जलापूर्ति से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी संचालन के लिए लंबित राशि को शीघ्र उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।
स्थानीय जरूरतों के अनुसार जलापूर्ति व्यवस्था बेहतर करने पर जोर
सम्मेलन में मिले सुझावों और मार्गदर्शन को झारखंड की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप लागू करने पर भी जोर दिया गया। राज्य में जलापूर्ति व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए योजनाओं के धरातल पर प्रभावी क्रियान्वयन को महत्वपूर्ण बताया गया।
जल संरक्षण, ग्रामीण पेयजल स्रोतों की सुरक्षा और नियमित जल सेवा सुनिश्चित करने से जुड़े सुझावों को राज्य की जरूरतों के अनुरूप लागू करने की दिशा में काम करने पर जोर दिया गया।
ग्रामीण परिवारों तक भरोसेमंद जल सेवा का लक्ष्य
दो दिवसीय विभागीय शिखर सम्मेलन में ग्रामीण परिवारों को पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के साथ जल संसाधनों के संरक्षण पर चर्चा हुई। जल परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी विचार किया गया।
झारखंड की ओर से सम्मेलन में रखी गई ₹6,105 करोड़ के लंबित केंद्रांश की मांग को राज्य की जलापूर्ति योजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में उठाया गया। सम्मेलन से प्राप्त सुझावों और मार्गदर्शन के आधार पर राज्य में जलापूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया।
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