अमेरिका ने इंफोसिस-TCS समेत आठ कंपनियों को PERM प्रोग्राम से किया निलंबित
- By rakesh --
- 09 Oct 2026 --
- comments are disable
नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिका ने आठ बड़ी टेक्नोलॉजी और आईटी सेवा कंपनियों को स्थायी श्रम प्रमाणन कार्यक्रम (PERM) से निलंबित कर दिया है। इस सूची में इंफोसिस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), विप्रो, HCL, कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब शामिल हैं। अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने 8 अक्टूबर को इस फैसले की घोषणा की।
अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक, निलंबन के दौरान इन कंपनियों से जुड़े नए PERM आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और लंबित आवेदनों पर भी प्रक्रिया रोक दी जाएगी। यह कार्यक्रम विदेशी कर्मचारियों के लिए रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण चरण है।
किन आठ कंपनियों पर हुई कार्रवाई?
अमेरिकी प्रशासन की घोषणा के अनुसार, निलंबित कंपनियों में छह आईटी सेवा और आउटसोर्सिंग कंपनियां तथा दो अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियां शामिल हैं।
- कॉग्निजेंट (Cognizant)
- इंफोसिस (Infosys)
- टाटा / TCS
- विप्रो (Wipro)
- HCL
- कैपजेमिनी (Capgemini)
- माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft)
- एडोब (Adobe)
अमेरिकी अधिकारियों ने इस कार्रवाई को विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति और श्रम प्रमाणन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच से जोड़ा है। हालांकि, सभी कंपनियों के खिलाफ आरोपों से संबंधित विस्तृत निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
अमेरिकी प्रशासन ने क्या कहा?
श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने कहा कि वर्ष 2009 से इन कंपनियों ने मिलकर करीब 30 लाख विदेशी कर्मचारियों के लिए आवेदन किए। उनके मुताबिक, इन कंपनियों से जुड़े 2.30 लाख से अधिक H-1B वीजा मंजूर हुए और एक लाख से ज्यादा स्थायी श्रम प्रमाणन जारी किए गए।
अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति से अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार के अवसर प्रभावित हुए। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी विदेशी श्रम कार्यक्रमों के कथित दुरुपयोग को लेकर चिंता जताई। ये प्रशासन के आरोप और दावे हैं; इन्हें सभी कंपनियों के खिलाफ साबित उल्लंघन नहीं माना जाना चाहिए।
PERM और ग्रीन कार्ड का क्या है संबंध?
PERM यानी Permanent Labor Certification अमेरिकी रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का एक अहम चरण है। इस प्रक्रिया में नियोक्ता को आम तौर पर यह साबित करना होता है कि संबंधित नौकरी के लिए पर्याप्त योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं और विदेशी कर्मचारी को नियुक्त करने से अमेरिकी कर्मचारियों की मजदूरी तथा कामकाजी परिस्थितियों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
PERM के निलंबन से प्रभावित कंपनियों के उन कर्मचारियों की स्थायी निवास प्रक्रिया अटक सकती है, जिनके आवेदन इस प्रक्रिया पर निर्भर हैं।
क्या H-1B वीजा भी हो जाएगा रद्द?
PERM प्रक्रिया पर रोक का अर्थ अपने आप यह नहीं है कि इन कंपनियों के सभी कर्मचारियों के मौजूदा H-1B वीजा या पहले से जारी ग्रीन कार्ड रद्द हो गए हैं। H-1B एक अस्थायी कार्य वीजा है, जबकि PERM रोजगार-आधारित स्थायी निवास की प्रक्रिया से जुड़ा है।
हालांकि, जिन कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया नियोक्ता के PERM आवेदन पर निर्भर है, उन्हें देरी या आगे की प्रक्रिया में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। वास्तविक असर हर कर्मचारी की वीजा स्थिति, आवेदन के चरण और लागू इमिग्रेशन नियमों पर निर्भर करेगा।
भारतीय IT कर्मचारियों के लिए क्यों अहम है फैसला?
इंफोसिस, TCS, विप्रो और HCL जैसी कंपनियों में बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर काम करते हैं। ऐसे में PERM प्रक्रिया पर रोक उन कर्मचारियों के लिए चिंता का विषय बन सकती है, जो अमेरिका में लंबे समय तक रहने और रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड पाने की योजना बना रहे हैं।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि निलंबन कितने समय तक लागू रहेगा और कंपनियों के लंबित मामलों पर आगे क्या निर्णय लिया जाएगा। प्रभावित कर्मचारियों को अपनी व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार कंपनी के इमिग्रेशन विभाग या योग्य अमेरिकी इमिग्रेशन विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
यह भी पढ़ें: सड़क से सदन और अब डॉक्टरेट तक, जयराम महतो के सफर में जुड़ी नई उपलब्धि