चीनी के दाम क्यों बढ़ रहे? 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट से मिलेगी राहत या अभी और बढ़ेगी कीमत
- By rakesh --
- 21 Aug 2026 --
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नई दिल्ली। देश में चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। 18 अगस्त 2026 को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 52.30 रुपये प्रति किलो पहुंच गई थी, जो एक साल पहले के 46.34 रुपये प्रति किलो के मुकाबले करीब 13 प्रतिशत अधिक है। वहीं, कई स्थानीय बाजारों में खुदरा कीमत इससे काफी ज्यादा बताई जा रही है।
चीनी की कीमतों में तेजी के बीच केंद्र सरकार ने बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी यानी रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है। यह आयात 31 अक्टूबर 2026 तक टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत किया जा सकेगा।
चीनी के दाम में इतनी तेजी क्यों आई?
चीनी की कीमतों में हाल के महीनों में तेज उछाल के पीछे घरेलू उपलब्धता और उत्पादन को लेकर चिंता प्रमुख वजहों में शामिल है। रिपोर्टों के अनुसार, पिछले दो महीनों में घरेलू चीनी कीमतों में करीब 40 प्रतिशत तक की तेजी आई है और एक्स-मिल कीमतें रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई हैं।
इसके अलावा आने वाले त्योहारी सीजन ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया है। अगस्त से नवंबर के बीच गणेश चतुर्थी, दशहरा और दिवाली जैसे त्योहारों के कारण मिठाइयों, बेकरी उत्पादों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग बढ़ती है। ऐसे में बाजार में उपलब्ध स्टॉक को लेकर चिंता कीमतों पर असर डाल रही है।
क्या एथेनॉल उत्पादन भी है वजह?
चीनी की कीमतों में तेजी को केवल एथेनॉल उत्पादन से जोड़ना सही नहीं होगा। गन्ने से एथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल का इस्तेमाल होने से चीनी उत्पादन की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, लेकिन मौजूदा तेजी के पीछे कमजोर उत्पादन, सीमित स्टॉक और बढ़ती मांग जैसे कई कारण बताए जा रहे हैं।
मौसम की स्थिति ने भी गन्ने की अगली फसल को लेकर चिंता बढ़ाई है। गन्ना पानी पर निर्भर फसल है और मौसम संबंधी चुनौतियों का असर भविष्य की उपलब्धता पर पड़ सकता है। ऐसे में बाजार में आपूर्ति को लेकर आशंकाएं कीमतों को प्रभावित कर रही हैं।
सरकार ने 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट को दी मंजूरी
बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र ने 10 लाख मीट्रिक टन रॉ शुगर के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है। यह कदम करीब एक दशक बाद भारत की ओर से चीनी आयात की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराकर कीमतों पर दबाव कम करना है।
सरकार ने आयात की समयसीमा 31 अक्टूबर 2026 तक रखी है, ताकि त्योहारी सीजन के दौरान बाजार में चीनी की उपलब्धता पर्याप्त बनी रहे। इसके साथ ही पोर्ट आधारित रिफाइनरियों से घरेलू बाजार में रिफाइंड चीनी उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जा रही है।
जमाखोरी रोकने के लिए स्टॉक लिमिट भी सख्त
सरकार ने सिर्फ आयात का सहारा नहीं लिया है, बल्कि जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए स्टॉक सीमा भी कड़ी की है। सितंबर से नवंबर 2026 के बीच महीने में 10 टन से अधिक चीनी इस्तेमाल करने वाले बड़े उपभोक्ताओं को 15 दिन से अधिक का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी। इससे पहले डीलरों के लिए 30 दिन की स्टॉक सीमा लागू की गई थी।
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में उपलब्ध चीनी अनावश्यक रूप से जमा न हो और मांग के समय इसकी आपूर्ति बनी रहे।
क्या आम लोगों को जल्द मिलेगी राहत?
ड्यूटी-फ्री आयात के फैसले से बाजार में अतिरिक्त चीनी आने की उम्मीद है, जिससे कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि, राहत कितनी जल्दी और कितनी बड़ी होगी, यह आयातित चीनी की अंतरराष्ट्रीय कीमत, परिवहन, बीमा और रिफाइनिंग लागत समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा।
जानकारों का मानना है कि आयातित चीनी को घरेलू बाजार में उपलब्ध कराने से कीमतों में तेजी पर ब्रेक लग सकता है। हालांकि, त्योहारी मांग और घरेलू उत्पादन की स्थिति को देखते हुए आने वाले हफ्ते महत्वपूर्ण रहेंगे। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि चीनी के दाम तुरंत पुराने स्तर पर लौट जाएंगे।
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