Operation Sindoor: पूर्व CDS अनिल चौहान का बड़ा खुलासा

Operation Sindoor: पूर्व CDS अनिल चौहान का बड़ा खुलासा, चीन की सैटेलाइट से भी पाकिस्तान को नहीं मिली जानकारी

नई दिल्ली। भारत के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े घटनाक्रम को लेकर बड़ा दावा किया है। नई दिल्ली के विवेकानंद सेंटर में आयोजित ‘विमर्श’ कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने अपने हमलों के परिणामों का आकलन करने के लिए चीन की कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरें हासिल करने की कोशिश की थी, लेकिन उसे अपेक्षित जानकारी नहीं मिल सकी।

जनरल चौहान के मुताबिक, पाकिस्तान को यह स्पष्ट जानकारी नहीं थी कि उसके हमलों का भारत में क्या असर हुआ। इसके बाद पाकिस्तानी सेना और सरकार ने हमलों के परिणामों के सबूत जुटाने के लिए सैटेलाइट तस्वीरों का सहारा लेने की कोशिश की।

पाकिस्तान को हमलों के नतीजों की जानकारी नहीं थी

जनरल अनिल चौहान ने बताया कि 10 से 12 मई के बीच पाकिस्तान की ओर से भारत में हुए हमलों के परिणामों का पता लगाने की कोशिश की गई। इसके लिए चीन की कमर्शियल सैटेलाइट सेवाओं से तस्वीरें हासिल करने का प्रयास किया गया।

उन्होंने कहा कि अमेरिका और चीन की निजी कंपनियां कमर्शियल सैटेलाइट तस्वीरें उपलब्ध कराती हैं। हालांकि इसके लिए अनुबंध, भुगतान और तस्वीरें उपलब्ध होने में लगने वाली समय-सीमा जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।

जनरल चौहान के अनुसार, पाकिस्तान को जब अपेक्षित तस्वीरें नहीं मिलीं तो वहां इस तरह की अटकलें लगने लगीं कि शायद भारत के दबाव के कारण उससे वास्तविक जानकारी छिपाई जा रही है।

युद्ध और राजनीति को लेकर क्या बोले जनरल चौहान

पूर्व CDS ने युद्ध और राजनीति के संबंध पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने प्रसिद्ध सैन्य विचारक कार्ल वॉन क्लॉजविट्ज के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीति और युद्ध को पूरी तरह अलग करके नहीं देखा जा सकता।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित सर्वोपरि होता है और सशस्त्र बल उस राष्ट्रहित की रक्षा के लिए उपलब्ध कई साधनों में से एक हैं।

जनरल चौहान ने उरी, बालाकोट और ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए कहा कि बदलते सुरक्षा माहौल में सशस्त्र बलों को हर बार नई और अलग रणनीति अपनाने की जरूरत होती है। उनके मुताबिक, पुरानी रणनीतियों को लगातार दोहराने से अपेक्षित परिणाम हासिल करना मुश्किल हो सकता है।

किराना पहाड़ियों के पास ड्रोन से जुड़ी घटना पर भी स्पष्टीकरण

जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय ड्रोन से जुड़ी एक घटना का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के सरगोधा और आसपास के इलाके में रडार की तलाश कर रहा एक भारतीय लोइटरिंग म्यूनिशन संभवतः किराना पहाड़ियों के पास जाकर टकरा गया था।

उन्होंने स्पष्ट किया कि किराना पहाड़ियों को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया गया था। उनके अनुसार, इजरायल में डिजाइन किया गया हारोप ड्रोन रडार की तलाश में था, लेकिन इलाके के पास पहुंचने के दौरान उसका ईंधन समाप्त हो गया।

जनरल चौहान ने कहा कि यह घटना किसी योजनाबद्ध हमले का हिस्सा नहीं थी, बल्कि ईंधन खत्म होने के कारण हुई एक अनियोजित घटना थी। उन्होंने एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) ए.के. भारती के उस बयान का भी समर्थन किया, जिसमें किराना पहाड़ियों को जानबूझकर निशाना नहीं बनाए जाने की बात कही गई थी।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सामने आई रणनीतिक तस्वीर

ऑपरेशन सिंदूर को 7 मई 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की सैन्य कार्रवाई के रूप में अंजाम दिया गया था। जनरल चौहान की ओर से बताए गए घटनाक्रम के मुताबिक, इसके बाद पाकिस्तान ने भारतीय कार्रवाई और अपने हमलों के परिणामों का आकलन करने के लिए विभिन्न माध्यमों से जानकारी जुटाने की कोशिश की।

पूर्व CDS के इस बयान से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सैटेलाइट इमेजरी, निगरानी क्षमता और आधुनिक युद्ध तकनीक की भूमिका भी सामने आती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य के संघर्षों में तकनीकी क्षमता और बदलती रणनीति का महत्व लगातार बढ़ता जाएगा।

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