Bihar Land Registration: 17 अगस्त से 141 निबंधन कार्यालयों में पूरी तरह पेपरलेस होगी रजिस्ट्री
- By rakesh --
- 11 Aug 2026 --
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पटना: बिहार में जमीन, प्लाट और फ्लैट के निबंधन की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के सभी 141 निबंधन कार्यालयों में 17 अगस्त से पेपरलेस निबंधन व्यवस्था लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। नई व्यवस्था में डीड तैयार करने से लेकर स्टांप शुल्क भुगतान, बायोमेट्रिक सत्यापन और डिजिटल हस्ताक्षर तक की प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी की जाएगी।
निबंधन पूरा होने के बाद संबंधित दस्तावेज की डिजिटल प्रति वाट्सएप या ई-मेल के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। इससे लोगों को कागजी दस्तावेजों के लिए कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।
चरणबद्ध तरीके से लागू हो रही पेपरलेस रजिस्ट्री
बिहार में पेपरलेस निबंधन व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। पहले चरण में 11 जुलाई से 10 निबंधन कार्यालयों में यह व्यवस्था शुरू की गई थी। इसके बाद 30 जुलाई को दूसरे चरण में 40 और कार्यालयों को इससे जोड़ा गया।
अब बाकी निबंधन कार्यालयों में भी 17 अगस्त से पेपरलेस व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। इस तरह राज्य के सभी 141 निबंधन कार्यालय डिजिटल प्रक्रिया से जुड़ जाएंगे।
पारदर्शिता और समय की बचत पर जोर
मद्यनिषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के सचिव नवीन कुमार ने मंगलवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को पेपरलेस निबंधन व्यवस्था को निर्धारित समय पर लागू करने के निर्देश दिए।
विभाग का मानना है कि डिजिटल प्रक्रिया से निबंधन में पारदर्शिता बढ़ेगी और दस्तावेजों की सुरक्षा बेहतर होगी। साथ ही पूरी प्रक्रिया में लगने वाले समय को कम करने में भी मदद मिलेगी।
75 साल से अधिक उम्र के लोगों को घर पर मिलेगी सुविधा
नई व्यवस्था में बुजुर्ग नागरिकों की सुविधा का भी ध्यान रखा गया है। अधिकारियों को 75 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों को जमीन, प्लाट और फ्लैट के निबंधन की सुविधा उनके घर पर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।
विभाग ने उन जिलों में भी व्यवस्था तेज करने को कहा है, जहां पेपरलेस निबंधन की प्रगति अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है।
सेवा प्रदाताओं को दी गई जिम्मेदारी
पेपरलेस निबंधन की प्रक्रिया में लाइसेंस प्राप्त सेवा प्रदाताओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्हें आम लोगों को प्रक्रिया में सहायता देने और व्यवस्था की निगरानी में सहयोग करने की जिम्मेदारी दी गई है।
सेवा प्रदाताओं के लिए उचित बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा गया है। दस्तावेज के मूल्य के आधार पर उनके पारिश्रमिक की राशि निर्धारित की गई है।
एक लाख रुपये तक मूल्य वाले दस्तावेज के लिए सेवा प्रदाता को 1000 रुपये, जबकि पांच लाख रुपये तक के दस्तावेज पर 2500 रुपये पारिश्रमिक मिलेगा। पांच लाख रुपये से अधिक मूल्य वाले दस्तावेज पर 5000 रुपये पारिश्रमिक निर्धारित किया गया है।
GIS तकनीक से होगा स्थल निरीक्षण
नई निबंधन व्यवस्था में स्थल निरीक्षण के लिए GIS तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। विभागीय सचिव ने जिला निबंधन कार्यालयों को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया है।
इस तकनीक के इस्तेमाल से स्थल निरीक्षण को अधिक व्यवस्थित बनाने और प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
शिकायत से लेकर कार्रवाई तक ऑनलाइन व्यवस्था
आम लोगों की शिकायतों के निपटारे के लिए पब्लिक ग्रीवेंस मॉड्यूल लागू करने का भी निर्देश दिया गया है। इसके तहत नागरिक ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकेंगे।
शिकायत की जांच, उस पर की गई कार्रवाई और उसके निष्पादन की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन माध्यम से पूरा किया जाएगा। इससे शिकायतों की निगरानी और उनके निपटारे में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है।
राजस्व चोरी रोकने के लिए निरीक्षण बढ़ेगा
राजस्व संग्रह में सुधार और राजस्व चोरी पर नियंत्रण के लिए विभाग ने नियमित निरीक्षण की व्यवस्था भी तय की है। सभी एआइजी को प्रत्येक सप्ताह 10 निबंधन कार्यालयों का स्थल निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है।
निरीक्षण के बाद रिपोर्ट मुख्यालय को भेजनी होगी। इसके अलावा मुख्यालय स्तर पर गठित टीम भी निबंधन कार्यालयों में जाकर व्यवस्था और राजस्व संग्रह की स्थिति की जांच करेगी।
विभाग का लक्ष्य पेपरलेस निबंधन के माध्यम से जमीन और संपत्ति के पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है।
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