टाटा संस की लिस्टिंग पर फिर हलचल, RBI ने पंजीकरण से बाहर निकलने की अर्जी की खारिज

टाटा संस की लिस्टिंग पर फिर हलचल, RBI ने पंजीकरण से बाहर निकलने की अर्जी की खारिज

जमशेदपुर: टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस की शेयर बाजार में संभावित लिस्टिंग का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक धन तक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष पहुंच रखने वाली बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और मुख्य निवेश कंपनियों (CIC) को नियामकीय नियमों का पालन करना होगा। वहीं, ऊपरी स्तर की NBFC श्रेणी में आने वाली कंपनियों के लिए शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना भी अनिवार्य है।

शुक्रवार को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान आरबीआई गवर्नर ने बड़ी वित्तीय कंपनियों के नियमन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि ऐसी कंपनियां समूह की अन्य कंपनियों के वित्तीय संसाधनों और बैलेंस शीट के आधार पर धन जुटा सकती हैं। इससे सार्वजनिक धन से जुड़े जोखिम पैदा होने की आशंका रहती है। इसलिए ऐसी कंपनियों को नियामकीय दायरे में रखना जरूरी है।

टाटा संस की लिस्टिंग क्यों बन सकती है जरूरी?

आरबीआई के नियमों के अनुसार, सार्वजनिक धन तक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष पहुंच रखने वाली पात्र NBFC और CIC को केंद्रीय बैंक के साथ पंजीकरण कराना होता है। यदि कोई कंपनी ऊपरी स्तर की NBFC की श्रेणी में आती है, तो उस पर शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने की अनिवार्यता भी लागू हो सकती है।

हालांकि, सार्वजनिक धन तक प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष पहुंच नहीं रखने वाली कुछ मुख्य निवेश कंपनियों को पंजीकरण संबंधी नियमों में छूट मिल सकती है। ऐसे में टाटा संस की नियामकीय स्थिति और लागू नियम उसकी लिस्टिंग से जुड़े फैसले में महत्वपूर्ण होंगे।

RBI ने टाटा संस की अर्जी क्यों खारिज की?

टाटा संस को सितंबर 2022 में ऊपरी स्तर की NBFC के रूप में वर्गीकृत किया गया था। इसके बाद कंपनी ने मार्च 2024 में आरबीआई से पंजीकरण से बाहर निकलने के लिए आवेदन किया था। जानकारी के मुताबिक, इस श्रेणी से बाहर आने की पात्रता हासिल करने के प्रयास में कंपनी ने अपना कर्ज भी चुकाया था।

हालांकि, आरबीआई ने पिछले महीने टाटा संस की पंजीकरण प्रमाणपत्र लौटाने संबंधी अर्जी खारिज कर दी। इस फैसले के बाद कंपनी की नियामकीय स्थिति और संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग को लेकर चर्चा तेज हुई है।

इस बीच, टाटा संस का निदेशक मंडल संभावित लिस्टिंग से जुड़े कदम आगे बढ़ा चुका है। हालांकि, समूह के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग विचार सामने आने के बीच कंपनी अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रही है। लिस्टिंग को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित नियमों और कंपनी के फैसलों पर निर्भर करेगी।

महंगाई और आर्थिक वृद्धि पर RBI की नजर

कार्यक्रम में संजय मल्होत्रा ने महंगाई नियंत्रण और आर्थिक विकास को लेकर भी केंद्रीय बैंक की प्राथमिकताएं बताईं। उन्होंने कहा कि कीमतों में स्थिरता बनाए रखना और दीर्घकालिक आर्थिक वृद्धि को समर्थन देना आरबीआई के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है।

सीमेंट और इस्पात की बिक्री, कर्ज वृद्धि, कर संग्रह और वाहन बिक्री जैसे संकेतकों का उल्लेख करते हुए उन्होंने अर्थव्यवस्था में गतिविधियों का जिक्र किया। हालांकि, खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों से जुड़े आपूर्ति संबंधी दबाव अब भी चुनौती बने हुए हैं। खबर में दिए गए बयान के अनुसार, चालू वर्ष के लिए औसत महंगाई दर का अनुमान 5.1 प्रतिशत बताया गया।

रुपये की विनिमय दर पर क्या है RBI का रुख?

डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति पर आरबीआई गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक किसी एक निश्चित विनिमय दर को लक्ष्य बनाकर काम नहीं करता। उसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा बाजार में व्यवस्थित परिस्थितियां बनाए रखना और रुपये में होने वाले अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करना है।

इसका अर्थ है कि आरबीआई किसी खास स्तर पर रुपये की विनिमय दर बनाए रखने के बजाय विदेशी मुद्रा बाजार में स्थिरता और सुचारु कामकाज पर ध्यान देता है।

टाटा समूह और निवेशकों की नजर आगे के फैसले पर

टाटा संस की संभावित लिस्टिंग का मामला कंपनी की नियामकीय स्थिति और आरबीआई के लागू नियमों से जुड़ा है। पंजीकरण से बाहर निकलने की अर्जी खारिज होने के बाद इस मुद्दे पर निवेशकों और कारोबारी जगत की दिलचस्पी बढ़ी है।

हालांकि, केवल इस फैसले के आधार पर लिस्टिंग की तारीख या अंतिम निर्णय तय नहीं माना जा सकता। आगे की स्थिति कंपनी की ओर से उठाए जाने वाले कदमों और नियामकीय प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

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