INGWC 2026: IIT ISM Dhanbad में भूजल विशेषज्ञों का जुटान, संरक्षण पर मंथन
- By rakesh --
- 26 Sep 2026 --
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धनबाद: मौसम का मिजाज बदल रहा है, पानी की जरूरत बढ़ रही है और ऐसे में जमीन के नीचे मौजूद पानी पर दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। इसी मुद्दे पर देशभर के विशेषज्ञ शुक्रवार को आईआईटी आईएसएम धनबाद में जुटे। यहां छठे इंडियन नेशनल ग्राउंडवाटर कॉन्फ्रेंस (INGWC-2026) की शुरुआत हुई।
दो दिवसीय इस सम्मेलन में भूजल की उपलब्धता, गुणवत्ता, प्रदूषण, बढ़ते दोहन और संरक्षण जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। सम्मेलन की थीम “ग्राउंडवाटर यूटिलाइजेशन–इश्यूज एंड चैलेंजेज अंडर क्लाइमेट चेंज सिनेरियोस” रखी गई है।
बदलती जलवायु के बीच भूजल की चुनौती
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि भूजल को सिर्फ जमीन के नीचे मौजूद पानी के तौर पर देखने से काम नहीं चलेगा। इसके पीछे मौसम, मिट्टी, बढ़ती आबादी, उद्योग, खेती और पानी की बढ़ती मांग जैसे कई पहलू जुड़े हैं।
इसी वजह से भूजल का आकलन, उसकी निगरानी और भविष्य में उपलब्धता का अनुमान लगाने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को साथ काम करने की जरूरत बताई गई।
सम्मेलन का आयोजन आईआईटी आईएसएम के सिविल इंजीनियरिंग, एनवायरनमेंटल साइंस एंड इंजीनियरिंग और मैथेमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग विभाग की ओर से एसोसिएशन ऑफ ग्लोबल ग्राउंडवाटर साइंटिस्ट्स (AGGS) के सहयोग से किया जा रहा है।
उद्घाटन समारोह में बीबीएमकेयू के कुलपति प्रो. राम कुमार सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में आईआईटी आईएसएम के डीन (फैकल्टी) एवं डायरेक्टर-इन-चार्ज प्रो. एमके सिंह, AGGS के प्रेसिडेंट प्रो. चेनिम्मलाई मयिल्स्वामी, AGGS के सेक्रेटरी और आईआईटी रुड़की के प्रो. बृजेश कुमार यादव समेत कई विभागों के प्रमुख और आयोजन समिति के सदस्य मौजूद रहे।
प्रदूषण और अनियंत्रित दोहन पर चिंता
उद्घाटन सत्र में प्रो. राजीव सरकार ने बताया कि सम्मेलन का मकसद अलग-अलग संस्थानों के शोधकर्ताओं और भूजल क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना है। यहां वैज्ञानिक पहलुओं के साथ समुदाय, उद्योग, बढ़ती जल मांग और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा की जा रही है।
वहीं प्रो. आलोक सिन्हा ने भूजल प्रदूषण और अनियंत्रित दोहन को बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने आर्सेनिक, फ्लोराइड और औद्योगिक प्रदूषण जैसी समस्याओं का उल्लेख किया। उनके मुताबिक जलवायु परिवर्तन के कारण भूजल से जुड़ी चुनौतियां और जटिल हुई हैं।
भूजल समझने में डेटा साइंस की भी बड़ी भूमिका
भूजल की समस्या को समझने के लिए सिर्फ पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहने के बजाय आधुनिक तकनीक और डेटा के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई।
प्रो. एसपी तिवारी ने बताया कि भूजल प्रणाली को बेहतर तरीके से समझने में गणित, सांख्यिकी, कंप्यूटिंग और डेटा साइंस की अहम भूमिका हो सकती है।
प्रो. बृजेश कुमार यादव ने कहा कि भूजल हाइड्रोलॉजी किसी एक विषय तक सीमित नहीं है। इसके बेहतर अध्ययन और प्रबंधन के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को साथ आना होगा।
AGGS के प्रेसिडेंट प्रो. चेनिम्मलाई मयिल्स्वामी ने बढ़ती आबादी और जलवायु परिवर्तन के कारण भूजल पर बढ़ते दबाव का जिक्र किया। उन्होंने युवा शोधकर्ताओं की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
जमीन पर जाकर समस्याओं को समझने की अपील
मुख्य अतिथि प्रो. राम कुमार सिंह ने भूजल को सॉयल-वाटर-प्लांट-एनवायरनमेंट कंटिन्यूम के व्यापक संदर्भ में समझने की जरूरत बताई। उन्होंने युवा शोधकर्ताओं से केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहने, बल्कि जमीनी स्तर पर जाकर वास्तविक समस्याओं को समझने की अपील की।
उन्होंने ऐसे शोध और नवाचार विकसित करने पर जोर दिया, जिन्हें बड़े स्तर पर इस्तेमाल किया जा सके।
आईआईटी आईएसएम के प्रो. एमके सिंह ने भी कहा कि भूजल संरक्षण किसी एक विभाग या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। इसमें सरकारी एजेंसियों के साथ किसान, उद्योग, शहरी निकाय, सिविल सोसाइटी और शिक्षण संस्थानों की भूमिका भी अहम है।
उन्होंने भूजल प्रबंधन के लिए “थ्री-एम प्रिंसिपल—मॉडलिंग, मॉनिटरिंग और मैनेजिंग” पर जोर दिया।
आठ वैज्ञानिकों को AGGS सम्मान
सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में भूजल विज्ञान के क्षेत्र में योगदान के लिए आठ वैज्ञानिकों को AGGS के अलग-अलग सम्मानों से सम्मानित किया गया।
AGGS Distinguished Fellow Award प्रो. मृत्युंजय कुमार सिंह, डीन (फैकल्टी), आईआईटी आईएसएम धनबाद और प्रो. अशोक के. केशरी, आईआईटी दिल्ली को दिया गया।
AGGS Lifetime Achievement Award डॉ. शिवेंद्र नाथ राय, सेवानिवृत्त चीफ साइंटिस्ट, CSIR-NGRI, हैदराबाद और प्रो. टीआई एल्धो, आईआईटी बॉम्बे को प्रदान किया गया।
वहीं AGGS Fellow Award के लिए प्रो. इंदुमती एम. नांबी, आईआईटी मद्रास, प्रो. आर. सेल्वकुमार, PSGIAS कोयंबटूर, प्रो. बेल्ली शिवकुमार, आईआईटी बॉम्बे और प्रो. डी. सुरेश कुमार, डायरेक्टर, CARDS, TNAU कोयंबटूर को सम्मानित किया गया।
आयोजकों के मुताबिक कुछ वैज्ञानिकों ने खुद पुरस्कार ग्रहण किए, जबकि कुछ की ओर से उनके प्रतिनिधियों ने सम्मान लिया। कुछ पुरस्कार सम्मेलन के समापन समारोह में दिए जाएंगे।
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