झारखंड के 20 वन प्रमंडलों में चलेगी नई पहल, जंगल बचाने के साथ रोजगार पर जोर

झारखंड के 20 वन प्रमंडलों में चलेगी नई पहल, जंगल बचाने के साथ रोजगार पर जोर

जमशेदपुर। झारखंड में जंगलों के संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए जापान के सहयोग से नई पहल की जा रही है। जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जाइका) की मदद से राज्य में प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा दिया जाएगा। इस परियोजना के तहत वन संरक्षण के साथ ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर विकसित करने पर जोर रहेगा।

20 वन प्रमंडलों और 1400 समितियों को जोड़ने की तैयारी

परियोजना के तहत झारखंड के 20 वन प्रमंडलों, 47 वन क्षेत्रों और लगभग 1400 संयुक्त वन प्रबंधन समितियों को जोड़कर काम करने की योजना है। इसके माध्यम से वन संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा।

परियोजना में जापानी विशेषज्ञ वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण देंगे। साथ ही आधुनिक तकनीक के हस्तांतरण और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में भी सहयोग किया जाएगा।

PCCF संजीव कुमार के साथ जाइका प्रतिनिधिमंडल की बैठक

परियोजना की प्रगति और कार्ययोजना को लेकर जाइका के प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह वन बल प्रमुख संजीव कुमार के साथ वन भवन में बैठक की। इसमें परियोजना की रणनीति, क्रियान्वयन और वन विभाग के अधिकारियों के बीच समन्वय जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

पीसीसीएफ संजीव कुमार ने बताया कि जाइका के साथ 10 साल का करार किया गया है। उन्होंने कहा कि परियोजना का काम जल्द ही धरातल पर उतारा जाएगा।

महुआ और तसर से बढ़ सकती है ग्रामीणों की आय

परियोजना में महुआ और तसर आधारित आजीविका को विशेष महत्व दिया जाएगा। झारखंड के ग्रामीण और वनवर्ती इलाकों में महुआ तथा तसर लोगों की आय के प्रमुख साधनों में शामिल हैं।

इनके व्यवस्थित संग्रहण, प्रसंस्करण और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाएगा, ताकि स्थानीय परिवारों को अपनी उपज का बेहतर लाभ मिल सके। इसके अलावा महिलाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने और स्वरोजगार के अवसर विकसित करने की भी योजना है।

जंगलों के संरक्षण में ग्रामीणों की भागीदारी पर जोर

परियोजना के तहत वन संरक्षण एवं प्रबंधन, मृदा और जल संरक्षण तथा समुदाय आधारित प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जाएंगी। संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के माध्यम से स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास होगा।

इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और जंगलों पर निर्भर ग्रामीण समुदायों की आजीविका के बीच संतुलन बनाना है। परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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