धनबाद: कतरी नदी पर कच्चा पुल बनाने पर FIR, 24 घंटे में हटाने का अल्टीमेटम

धनबाद: कतरी नदी पर कच्चा पुल बनाने पर FIR, 24 घंटे में हटाने का अल्टीमेटम

धनबाद। बाघमारा में कतरी नदी के प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित करने के आरोपों पर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कोयला परिवहन के लिए नदी के बीच आठ स्पैन का कच्चा पुल बनाने और किनारे मिट्टी व ओवरबर्डन भरकर बहाव क्षेत्र को संकीर्ण करने के मामले में बीसीसीएल के अधिकारियों और आरके कोल माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। प्रशासन ने संबंधित पक्षों को 24 घंटे के भीतर पुल हटाने का निर्देश दिया है। आदेश का पालन नहीं होने पर बलपूर्वक पुल हटाने और कार्रवाई का खर्च संबंधित पक्षों से वसूलने की चेतावनी दी गई है।

निरीक्षण में नदी के बीच आठ स्पैन का पुल मिला

अंचलाधिकारी गिरिजानंद किस्कू के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद प्रशासनिक टीम ने मौके पर जाकर भौतिक निरीक्षण किया। इस दौरान नदी के बीच आठ स्पैन का कच्चा पुल बना हुआ पाया गया। साथ ही नदी के किनारे मिट्टी भरकर रास्ता तैयार करने और बहाव क्षेत्र को संकीर्ण किए जाने की बात भी सामने आई।

प्रशासन ने मौके पर मौजूद संबंधित लोगों से पुल निर्माण की अनुमति और आवश्यक दस्तावेज मांगे, लेकिन उपलब्ध कराए गए दस्तावेज संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद मामले में प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई की गई।

24 घंटे में पुल हटाने का निर्देश

अंचलाधिकारी गिरिजानंद किस्कू ने बताया कि मामले की रिपोर्ट उपायुक्त को भेजी जा रही है। संबंधित पक्षों को पुल हटाने के लिए 24 घंटे का समय दिया गया है। निर्धारित अवधि में पुल नहीं हटाए जाने पर प्रशासन इसे बलपूर्वक हटाएगा। इस कार्रवाई में होने वाले खर्च की वसूली भी संबंधित पक्षों से की जाएगी।

बीसीसीएल अधिकारियों और कंपनी से जुड़े लोगों की भूमिका जांच के दायरे में

मामले में बीसीसीएल के अधिकारियों के साथ आरके कोल माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। प्रशासन यह पता लगाएगा कि नदी में पुल बनाने की अनुमति किस स्तर पर दी गई थी और निर्माण से पहले जरूरी स्वीकृतियां ली गई थीं या नहीं।

फिलहाल संबंधित पक्षों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि, निर्माण और प्राकृतिक जलप्रवाह को प्रभावित करने से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की भी होगी जांच

जिला प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जल संसाधन विभाग, खनन विभाग, पर्यावरण विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से समन्वय कर रिपोर्ट लेने की बात कही है। जांच में यदि पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो मामले को राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष उठाया जा सकता है।

प्रशासन का कहना है कि नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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