1,390 करोड़ के निवेश में 727 करोड़ का नुकसान, CMPFO मामले में CBI ने दर्ज किया केस

1,390 करोड़ के निवेश में 727 करोड़ का नुकसान, CMPFO मामले में CBI ने दर्ज किया केस

धनबाद: कोयला खान भविष्य निधि संगठन (सीएमपीएफओ), धनबाद को दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) में निवेश के कारण हुए 727.67 करोड़ रुपये के नुकसान के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच, रांची ने 22 अक्टूबर को नियमित मामला दर्ज किया। प्राथमिकी में सीएमपीएफओ के तत्कालीन आयुक्त अनिमेष भारती और डीएचएफएल के तत्कालीन प्रमोटर एवं निदेशक कपिल वाधवान तथा धीरज वाधवान को नामजद आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा संगठन के अज्ञात अधिकारियों और अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।

सीबीआई ने इस मामले में आरसी 0242026A0014 के तहत केस दर्ज किया है। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि निवेश में जोखिम की जानकारी और विशेषज्ञों की सलाह के बावजूद समय पर राशि वापस निकालने की पहल क्यों नहीं की गई। सीएमपीएफओ की बड़ी रकम डीएचएफएल की दिवालियापन प्रक्रिया में फंस गई थी, जिससे संगठन को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।

2015 से 2018 के बीच डीएचएफएल में निवेश किए गए 1,390 करोड़

सीबीआई की प्राथमिकी के अनुसार, सीएमपीएफओ ने वर्ष 2015 से 2018 के बीच डीएचएफएल में करीब 1,390.25 करोड़ रुपये का निवेश किया था। बाद में निवेश की स्थिति और उससे जुड़े वित्तीय जोखिमों को देखते हुए विशेषज्ञों और फंड प्रबंधकों ने राशि वापस निकालने की सलाह दी थी।

आरोप है कि संभावित जोखिम और चेतावनियों के बावजूद सीएमपीएफओ प्रबंधन ने समय रहते निवेश की रकम निकालने के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए। जांच एजेंसी अब यह पता लगाएगी कि निवेश से जुड़े फैसले किस आधार पर लिए गए और जोखिम की जानकारी मिलने के बाद भी राशि निकालने में देरी क्यों हुई।

छह महीने तक लंबित रहा रकम निकालने का फैसला

मामले में सामने आए तथ्यों के अनुसार, 20 दिसंबर 2019 को निवेश की राशि वापस निकालने का प्रस्ताव पारित किया गया था। हालांकि, इससे पहले करीब छह महीने तक इस संबंध में निर्णय लंबित रहा। इसी अवधि के दौरान डीएचएफएल दिवालियापन और समाधान प्रक्रिया में चली गई।

इसके परिणामस्वरूप सीएमपीएफओ की बड़ी रकम फंस गई। संगठन को इस निवेश के कारण करीब 727.67 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सीबीआई अब यह जांच करेगी कि राशि वापस निकालने का प्रस्ताव लंबित रहने के पीछे क्या कारण थे और क्या इस दौरान किसी स्तर पर जानबूझकर देरी की गई थी।

झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर शुरू हुई सीबीआई जांच

इस मामले में डब्ल्यूपी (पीआईएल) संख्या 4486/2022 की सुनवाई के दौरान झारखंड हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया था। अदालत ने सार्वजनिक धन से जुड़े 727.67 करोड़ रुपये के नुकसान को गंभीर मामला मानते हुए निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की आवश्यकता बताई थी।

अदालत की टिप्पणी थी कि उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले को केवल व्यावसायिक नुकसान या निर्णय लेने में हुई चूक तक सीमित नहीं माना जा सकता। इसमें आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात और भ्रष्टाचार की आशंका सहित अन्य पहलुओं की भी जांच जरूरी है। हाईकोर्ट के आठ अक्टूबर के आदेश के बाद सीबीआई ने 22 अक्टूबर को प्राथमिकी दर्ज की।

विभागीय कार्रवाई को आपराधिक जांच का विकल्प नहीं माना

हाईकोर्ट ने सीबीआई को प्राथमिकी दर्ज कर मामले के सभी पहलुओं की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया था कि विभागीय कार्रवाई आपराधिक जांच का विकल्प नहीं हो सकती।

सुनवाई के दौरान तत्कालीन क्षेत्रीय आयुक्त पंकज कुमार की ओर से दाखिल हलफनामे को भी अदालत ने स्वीकार नहीं किया था। इस हलफनामे में मामले को व्यावसायिक नुकसान बताते हुए अलग आपराधिक कार्रवाई की आवश्यकता से इनकार किया गया था। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को मामले से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज सीबीआई को उपलब्ध कराने और जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था।

धोखाधड़ी, साजिश और भ्रष्टाचार की धाराओं में केस

सीबीआई ने प्राथमिकी में भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 409 (आपराधिक विश्वासघात) और 420 (धोखाधड़ी) के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2), सहपठित 13(1)(डी) तथा संशोधित धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया है। केस की जांच सीबीआई के डीएसपी कुलदीप को सौंपी गई है।

अब जांच एजेंसी निवेश से जुड़े फैसलों, वित्तीय विशेषज्ञों की चेतावनियों, राशि वापस निकालने में हुई देरी और कथित मिलीभगत की पड़ताल करेगी। साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि जोखिम की जानकारी होने के बावजूद निवेश की रकम समय पर वापस निकालने के लिए कदम क्यों नहीं उठाए गए। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद अब इस मामले में सीबीआई की विस्तृत जांच पर नजर रहेगी।

यह भी पढ़ें: रांची में आज JTET-2026, सुबह 6:30 से शाम 7:30 बजे तक लागू रहेगा निषेधाज्ञा आदेश