Brajmohan Ram बने ओडिशा के 28वें राज्यपाल, जानें पलामू से लोकभवन तक का पूरा राजनीतिक सफर

Brajmohan Ram बने ओडिशा के 28वें राज्यपाल, जानें पलामू से लोकभवन तक का पूरा राजनीतिक सफर

भुवनेश्वर/पलामू: पलामू के पूर्व सांसद और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता ब्रजमोहन राम ने रविवार को भुवनेश्वर स्थित लोकभवन में आयोजित समारोह में ओडिशा के 28वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। ओडिशा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश हरीश टंडन ने मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी, विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी, राज्य के मंत्रियों, सांसदों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी में उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई।

ब्रजमोहन राम ने हरि बाबू कंभमपति का स्थान लिया है, जिन्होंने 3 जनवरी 2025 को राज्यपाल का कार्यभार संभाला था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 12 अक्टूबर को ब्रजमोहन राम को ओडिशा का नया राज्यपाल नियुक्त किया था। झारखंड के पलामू क्षेत्र से तीन बार लोकसभा सदस्य रह चुके ब्रजमोहन राम का राजनीतिक सफर बिहार विधानसभा से शुरू होकर संसद तक पहुंचा।

चंदवा में हुआ जन्म, लोहरदगा से की बीए की पढ़ाई

ब्रजमोहन राम का जन्म 1 जनवरी 1958 को तत्कालीन बिहार के लातेहार जिले के चंदवा में हुआ था। उनके पिता का नाम अर्जुन राम बैठा और माता का नाम चैती देवी है। ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े ब्रजमोहन राम के परिवार का मुख्य पेशा कृषि रहा है।

उन्होंने बीएस कॉलेज, लोहरदगा से बीए की पढ़ाई पूरी की। 5 मार्च 1979 को उनका विवाह लीला देवी से हुआ। उनके तीन बेटे हैं। चंदवा से शुरू हुआ उनका सफर उस दौर से जुड़ा है, जब झारखंड अलग राज्य नहीं बना था और यह क्षेत्र बिहार का हिस्सा था।

लातेहार विधानसभा से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

ब्रजमोहन राम के राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बिहार विधानसभा रहा। वह वर्ष 1991 से 1995 तक लातेहार विधानसभा क्षेत्र से बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। इस दौरान उन्होंने क्षेत्रीय स्तर पर जनता का प्रतिनिधित्व किया और अपनी राजनीतिक पहचान बनाई।

विधानसभा में काम करने के अनुभव के बाद उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति की ओर कदम बढ़ाया। आगे चलकर वह पलामू क्षेत्र से लोकसभा पहुंचे और संसदीय राजनीति में अपनी जगह बनाई।

लगातार तीन बार लोकसभा के लिए चुने गए

ब्रजमोहन राम वर्ष 1996 में 11वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए। इसके बाद वर्ष 1998 में 12वीं लोकसभा और वर्ष 1999 में 13वीं लोकसभा के लिए भी चुने गए। इस तरह उन्होंने लगातार तीन लोकसभा कार्यकालों में सांसद के रूप में काम किया।

संसद में उनके कार्यकाल के दौरान उन्हें विभिन्न विषयों से जुड़ी समितियों में काम करने का अवसर मिला। इससे उन्हें गृह मामलों, सामाजिक कल्याण, ऊर्जा, कोयला और परिवहन जैसे क्षेत्रों से जुड़े संसदीय कार्यों का अनुभव प्राप्त हुआ।

संसदीय समितियों में निभाईं अहम जिम्मेदारियां

ब्रजमोहन राम ने अपने संसदीय कार्यकाल के दौरान कई महत्वपूर्ण समितियों में भागीदारी की। वर्ष 1996-97 में वह गृह मामलों की समिति और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति के सदस्य रहे। इसी अवधि में उन्होंने इस्पात एवं खान मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति तथा पूर्वी रेलवे से संबंधित अनौपचारिक समिति में भी काम किया।

वर्ष 1998-99 में वह ऊर्जा समिति, विद्युत उपसमिति-I और कोयला मंत्रालय की परामर्शदात्री समिति से जुड़े रहे। वर्ष 2000 से 2004 के बीच उन्होंने परिवहन एवं पर्यटन समिति में सदस्य के रूप में काम किया। रेल मंत्रालय की सलाहकार समिति में भी उनकी भूमिका रही।

पलामू से ओडिशा के राज्यपाल पद तक का सफर

बिहार विधानसभा के सदस्य से लेकर तीन बार लोकसभा सांसद और अब ओडिशा के राज्यपाल तक का सफर ब्रजमोहन राम के राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है। उनके राज्यपाल बनने से झारखंड के पलामू और लातेहार क्षेत्र में भी यह नियुक्ति चर्चा का विषय बनी है। अब वह ओडिशा के संवैधानिक प्रमुख के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे।

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