झारखंड के 49 नगर निकायों में टैक्स वसूली के नियम बदले, घर-घर नकद भुगतान पर रोक

झारखंड के 49 नगर निकायों में टैक्स वसूली के नियम बदले, घर-घर नकद भुगतान पर रोक

धनबाद: झारखंड के नगर निकायों में राजस्व वसूली व्यवस्था को पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए राज्य सरकार ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है। ‘अपना नगर-अपना राजस्व’ पहल के तहत तैयार इस व्यवस्था में होल्डिंग टैक्स, जल कर और ट्रेड लाइसेंस शुल्क की वसूली से लेकर बकाया राशि की वसूली और खातों के ऑडिट तक के नियम निर्धारित किए गए हैं।

नई व्यवस्था के तहत टैक्स कलेक्टर घर-घर जाकर नकद या चेक से टैक्स नहीं वसूल सकेंगे। वहीं, किसी संपत्ति के क्षेत्रफल या उपयोग में बदलाव के आधार पर होल्डिंग टैक्स संशोधित करने से पहले भौतिक सत्यापन और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

झारखंड के सभी 49 नगर निकायों में लागू होगी SOP

राज्य सरकार की ओर से तैयार यह SOP झारखंड के सभी 49 शहरी स्थानीय निकायों में लागू होगी। इसके तहत नगर निकायों को घरों की संख्या और उपलब्ध कर्मचारियों के आधार पर टैक्स कलेक्टरों की तैनाती करनी होगी। प्रस्तावित व्यवस्था में लगभग 3,000 घरों पर एक टैक्स कलेक्टर तैनात करने का प्रावधान बताया गया है।

टैक्स कलेक्टरों की जिम्मेदारी संपत्तियों का सर्वेक्षण, जियो-टैगिंग, टैक्स बिल पहुंचाने और बकायेदारों से संपर्क करने की होगी। हालांकि, वे अपने स्तर पर टैक्स निर्धारित नहीं कर सकेंगे और न ही कानूनी आदेश जारी करने के लिए अधिकृत होंगे।

इसके अलावा धनबाद, रांची और गिरिडीह में संपत्तियों की पहचान और जांच के लिए 3डी मॉडल आधारित पायलट परियोजना प्रस्तावित है।

घर-घर नकद टैक्स वसूली पर रोक, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा

नई SOP के अनुसार, टैक्स कलेक्टर घर-घर जाकर नकद या चेक के माध्यम से राशि नहीं वसूलेंगे। नागरिक नगर निकाय के पोर्टल, मोबाइल एप, यूपीआई क्यूआर कोड, ऑनलाइन लिंक और अन्य अधिकृत माध्यमों से टैक्स जमा कर सकेंगे।

नकद भुगतान की सुविधा केवल अधिसूचित वार्ड सुविधा केंद्रों या नगर निकाय के अधिकृत शिविरों में उपलब्ध होगी। प्रत्येक भुगतान पर डिजिटल प्लेटफॉर्म से जारी रसीद देना अनिवार्य होगा। जमा की गई राशि सीधे नगर निकाय के बैंक खाते में जाएगी।

इस व्यवस्था से टैक्स वसूली के रिकॉर्ड, भुगतान और बैंक खाते में जमा राशि का मिलान करना आसान होगा। साथ ही, राजस्व संग्रह में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

तस्वीर देखकर सीधे नहीं बढ़ेगा होल्डिंग टैक्स

सैटेलाइट तस्वीर, नक्शे या 3डी मॉडल के जरिए किसी संपत्ति के क्षेत्रफल अथवा उपयोग में अंतर सामने आने पर नगर निकाय सीधे टैक्स नहीं बढ़ा सकेंगे। पहले संबंधित संपत्ति का भौतिक सत्यापन करना होगा। इसके बाद सक्षम अधिकारी नियमानुसार निर्णय लेंगे और संपत्ति मालिक को नोटिस देकर अपनी बात रखने तथा आपत्ति दर्ज कराने का अवसर देंगे।

स्व-निर्धारण के दौरान कम क्षेत्रफल दिखाने या संपत्ति के उपयोग की गलत जानकारी देने से टैक्स कम जमा होने का मामला सामने आता है, तो बकाया अंतर की राशि के साथ 50 से 100 प्रतिशत तक जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए लागू नियमों के अनुसार नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

टैक्स बकाया रहने पर बैंक खाते या संपत्ति की कुर्की संभव

निर्धारित समयसीमा में टैक्स जमा नहीं करने वाले लोगों को एसएमएस, पोर्टल और पत्र के माध्यम से भुगतान की याद दिलाई जाएगी। इसके बाद मांग नोटिस जारी कर वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकेगी।

लगातार बकाया रहने पर संबंधित कानून और नियमों के तहत बैंक खाते या संपत्ति की कुर्की और बिक्री जैसी कार्रवाई की जा सकती है। जल शुल्क और ट्रेड लाइसेंस शुल्क के बकाये पर भी लागू प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई होगी।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य बकायेदारों से नियमानुसार राजस्व वसूलना और नगर निकायों की आय बढ़ाना है।

रोजाना होगा वसूली और बैंक खातों का मिलान

नई व्यवस्था के तहत नगर निकायों को हर दिन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दर्ज टैक्स वसूली, पेमेंट गेटवे के रिकॉर्ड और बैंक खाते में जमा राशि का मिलान करना होगा। किसी तरह की गड़बड़ी सामने आने पर उसे निर्धारित समयसीमा में दूर करना होगा।

पुरानी एजेंसी या पोर्टल से प्राप्त आंकड़ों को नई व्यवस्था में शामिल करने से पहले उनका भी मिलान किया जाएगा। इससे राजस्व संबंधी रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने और वित्तीय गड़बड़ियों की पहचान करने में मदद मिलेगी।

सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य नगर निकायों में टैक्स वसूली को डिजिटल और पारदर्शी बनाना, संपत्तियों का सटीक रिकॉर्ड तैयार करना तथा पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

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