NPCI ने दिवाली तक टाली MDR लागू करने की तारीख, दुकानदारों को राहत

UPI Payment Charges: NPCI ने दिवाली तक टाली MDR लागू करने की तारीख, दुकानदारों को राहत

डिजिटल पेमेंट करने वाले लोगों और कारोबारियों के लिए राहत की खबर है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने कुछ चुनिंदा UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की तारीख आगे बढ़ा दी है। मंगलवार को जारी बयान में NPCI ने बताया कि त्योहारों के मौसम को देखते हुए शुल्क लागू करने का फैसला दिवाली के बाद तक टाल दिया गया है। नई तारीख की घोषणा बाद में की जाएगी।

इस फैसले का असर उन कारोबारियों पर पड़ सकता है, जो निर्धारित श्रेणियों में आने वाले मर्चेंट पेमेंट स्वीकार करते हैं। फिलहाल नई तारीख घोषित होने तक मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी।

किन UPI ट्रांजैक्शन पर MDR शुल्क लगाने का प्रावधान?

दी गई जानकारी के मुताबिक, नई व्यवस्था में कुछ निर्धारित कमर्शियल UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने का प्रावधान है। ₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट पेमेंट पर 0.4 प्रतिशत शुल्क निर्धारित किए जाने की बात कही गई है। वहीं, ₹75,000 से अधिक के लेनदेन पर अधिकतम ₹300 MDR का उल्लेख है।

₹2,000 तक के भुगतान पर शुल्क नहीं लगाने की बात कही गई है। हालांकि, ये नियम सभी UPI ट्रांजैक्शन पर लागू नहीं होंगे। शुल्क का संबंध निर्धारित श्रेणियों के कारोबारी भुगतान से है, न कि सामान्य व्यक्ति-से-व्यक्ति पैसे भेजने से।

शुल्क की दर और लागू होने की तारीख के बारे में अंतिम जानकारी के लिए NPCI की आधिकारिक अधिसूचना देखना जरूरी होगा।

रेलवे, पेट्रोल और बिजली बिल के भुगतान पर क्या होगा?

बताई गई व्यवस्था के तहत रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, पेट्रोल-डीजल, बिजली-पानी जैसी उपयोगिता सेवाओं और शिक्षा क्षेत्र के कुछ पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन के लिए अलग शुल्क का प्रावधान है।

इन श्रेणियों में ₹2,000 से अधिक के निर्धारित लेनदेन पर 5 रुपये का फ्लैट MDR रखे जाने की जानकारी दी गई है। यानी पात्र भुगतान पर प्रतिशत के बजाय तय राशि शुल्क के रूप में लागू हो सकती है।

हालांकि, हर बिल या भुगतान पर यह शुल्क लगेगा, ऐसा मानना सही नहीं होगा। शुल्क संबंधित श्रेणी, लेनदेन की पात्रता और लागू नियमों पर निर्भर करेगा।

छोटे दुकानदारों और सामान्य UPI यूजर्स को कितनी राहत?

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मौजूदा QR कोड के जरिए हर महीने एक लाख रुपये तक UPI भुगतान स्वीकार करने वाले छोटे दुकानदारों के लिए जीरो-MDR व्यवस्था जारी रहने की बात कही गई है।

वहीं, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में UPI के जरिए पैसे भेजने पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। सामान्य व्यक्ति-से-व्यक्ति ट्रांसफर की राशि कितनी भी हो, इस पर प्रस्तावित मर्चेंट शुल्क लागू नहीं होता।

वित्त मंत्रालय के हवाले से यह भी कहा गया है कि नई व्यवस्था से लगभग 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन प्रभावित नहीं होंगे। इसका अर्थ है कि प्रस्तावित शुल्क का दायरा चुनिंदा कारोबारी लेनदेन तक सीमित रखने की बात कही गई है।

MDR क्या है और इसे कौन देता है?

MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले भुगतान से जुड़ी बैंकिंग या प्रोसेसिंग व्यवस्था के तहत देते हैं। यह शुल्क कारोबारी भुगतान को प्रोसेस करने से संबंधित होता है।

MDR को सीधे सरकारी टैक्स नहीं माना जाता। इसका भुगतान और संग्रह संबंधित भुगतान व्यवस्था तथा लागू नियमों के अनुसार होता है। सामान्य UPI ट्रांसफर और पात्र मर्चेंट ट्रांजैक्शन के नियम अलग-अलग हो सकते हैं।

NPCI ने त्योहारों के मौसम को देखते हुए नई व्यवस्था लागू करने की तारीख आगे बढ़ाई है। अब कारोबारियों और डिजिटल पेमेंट यूजर्स की नजर दिवाली के बाद घोषित होने वाली नई तारीख और आधिकारिक दिशा-निर्देशों पर रहेगी।

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